कानपुर के ARTO आलोक कुमार व ARTO प्रवर्तन सोमलता यादव निलंबित, पकड़ी गई थी अनियमितताएं

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कानपुर के एआरटीओ आलोक कुमार और एआरटीओ प्रवर्तन सोमलता यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. बीते दिनों परिवहन विभाग के दफ्तर में छापेमारी के दौरान तमाम अनियमितताएं पकड़ी गई थी. काम के एवज में रिश्वतखोरी और उगाही के तमाम सबूत सामने आए थे. एआरटीओ आलोक कुमार को मुख्यालय से संबंध किया गया है.

औचक निरीक्षण में सामने आई अनियमितताएं मामले की शिकायतों के बाद कानपुर के जिलाधिकारी ने अपर पुलिस उपायुक्त और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी के नेतृत्व में संभागीय एवं सहायक परिवहन कार्यालय का औचक निरीक्षण कराया. टीम ने कार्यालय में मौजूद करीब 50 लोगों से पूछताछ की. इस दौरान 11 संदिग्ध लोगों को चिन्हित किया गया, जो वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर आवेदकों से अवैध रूप से पैसे वसूल रहे थे.

सोमलता यादव और आलोक कुमार

जांच के दौरान इन लोगों के पास से 43,485 रुपये नकद बरामद किए गए. जांच में परिवहन कार्यालय के दो लिपिक मधुर मिश्रा और विपिन कुमार की भी संलिप्तता सामने आई. 15 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर मामले में जिला प्रशासन की ओर से कुल 15 लोगों के खिलाफ थाना काकादेव, कानपुर नगर में एफआईआर दर्ज कराई गई है. इनमें परिवहन कार्यालय के दो लिपिक भी शामिल हैं.

प्रशासन की कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर भी जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई. 26,750 रुपये लेकर 21,750 की रसीद देने का आरोप निरीक्षण के दौरान एक ट्रक चालक ने अधिकारियों को बताया कि कार्यालय के एक कर्मचारी ने उससे 26,750 रुपये लिए, लेकिन उसे केवल 21,750 रुपये की जमा पर्ची दी गई. कैश का मिलान करने पर जांच टीम को भी इस तरह की अनियमितता के संकेत मिले.

जिलाधिकारी ने निरीक्षण की पूरी रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजी थी. प्रथम दृष्टया अनियमितताओं में संलिप्तता, कार्यालय की निगरानी में लापरवाही, अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण न रखने और शासनादेशों की अनदेखी के आरोप में एआरटीओ प्रवर्तन तृतीय दल सोमलता यादव और एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार को निलंबित किया गया है.

वहीं, आरटीओ प्रशासन राकेन्द्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.

मंत्री बोले- भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि परिवहन कार्यालयों में अनधिकृत लोगों के काम करने पर रोक लगाने के लिए शासन और मुख्यालय स्तर से लगातार निर्देश दिए जाते रहे हैं. इसके बावजूद कानपुर कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अनधिकृत लोगों द्वारा काम किया जाना गंभीर मामला है. उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवहन विभाग में किसी भी स्तर पर लापरवाही, अवैध वसूली और लोगों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

निलंबन अवधि में मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे: निलंबन की अवधि में सोमलता यादव और आलोक कुमार को परिवहन विभाग के मुख्यालय से संबद्ध किया गया है. उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा. पूरे मामले की विभागीय जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), वाराणसी को जांच अधिकारी नामित किया गया है.

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