प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बगैर किसी का नाम लिए देश के मान-सम्मान को चोट पहुंचाने वाली ताकतों, समाज को बांटने वाले लोगों और देश की संस्कृति से नफरत करने वाली मानसिकता को देश का दुश्मन बताया है, साथ ही लोगों से अपील करते हुए कहा है कि ‘हमें मां भारती के शत्रुओं को पहचानना होगा, उन्हें परास्त करना होगा और राष्ट्र प्रथम का संकल्प लेते हुए सबको एकसाथ आना होगा।’ पीएम ने ये बातें विजयादशमी के अवसर पर राजधानी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान कही।
‘सियावर रामचंद्र की जय’ से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पीएम ने कहा कि भारत की संस्कृति और पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु राम की उपासना की है। यह आस्था केवल इसलिए नहीं है कि राम ने रावण का अंत किया, बल्कि इसलिए भी है कि उन्होंने मानवता को अतुलनीय आदर्श दिए।
‘हर संकट को सहकर धर्म का पालन किया’: समारोह के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि ‘प्रभु राम ने अपने जीवन में कितनी ही कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने सच्चाई और नेकी का रास्ता कभी नहीं छोड़ा।’ पीएम ने कहा, ‘उनके चेहरे पर न राजपथ पा ने की प्रसन्नता हुई और न वन जाने का दुख। उन्होंने हर संकट सहकर भी धर्म का पालन किया और सत्य की स्थापना की।’
‘राम के आदर्शों से मिलती है सुशासन की प्रेरणा’: पीएम ने रामराज्य का मतलब बताते हुए उसे सुशासन का मानदंड बताया और कहा ‘वनवास से वापस आकर प्रभु राम जब अयोध्या के राजा बने तो ऐसे राम राज्य की स्थापना की जो आज भी सुशासन का मानदंड माना जाता है।’ फिर उन्होंने राम राज्य का अर्थ बताते हुए कहा कि ‘राम राज्य अर्थात ऐसा शासन जहां किसी के प्रति भेदभाव नही हो, जहां सबको न्याय मिले, जहां सबको समान अवसर मिले, जहां सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण का हो।’
तुलसीदास की कही बात का किया उल्लेख: आगे उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की कही बात का उल्लेख करते हुए कहा, ‘इसलिए ही तुलसीदास जी ने कहा था, ‘दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज नहीं काहुही व्यापा’, यही मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम का आदर्श है, इसलिए हमें हमेशा जनता को जनार्दन मानकर, नागरिक देवो भवः के मंत्र पर आगे बढ़ना है। हमें गरीब, वंचित की सेवा को सर्वोपरि रखना है।’
‘रामजी ने सिखाया संकट कितना भी बड़ा क्यों ना हो…’: आगे पीएम ने श्रीराम के जीवन सीख लेने का संदेश देते हुए कहा, ‘साथियों प्रभु राम के जीवन से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है, संकट कितना भी बड़ा क्यों ना हो, चुनौती कितनी भी कठिन क्यों ना हो, हमें दूसरों के भरोसे नहीं बैठना है, हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है, हमें अपने संसाधनों पर विश्वास करना है, अपने संकल्प को शक्ति बनाना है और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है।’
‘श्रीराम से मिलता है सफलता का मूलमंत्र’: आगे उन्होंने कहा, ‘प्रभु राम ने हमें सिखाया कि रास्ता की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकती। समुद्र सामने था, लंका दूर थी, लेकिन संकल्प अडिग था, इसलिए रामजी ने जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया, जनभागीदारी को अपना संबल बनाया, उपलब्ध संसाधनों को जोड़ा और असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया। यही सफलता का मूलमंत्र है। अपनी शक्ति पर विश्वास, अपने सामर्थ्य पर भरोसा, अपने संसाधनों का सही उपयोग और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट संकल्प, आज हमें भी इसी मंत्र को लेकर आगे बढ़ना है।’
‘देश के सामने विकसित और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य’: इसके बाद उन्होंने देश के सामने मौजूद लक्ष्यों को बताते हुए कहा कि ‘हमारे सामने विकसित भारत का लक्ष्य है, हमारे सामने आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य है, हमें जनशक्ति से जनकल्याण करते हुए जनता की हर आकांक्षाओं को पूरा करना है।’
पीएम ने इस तरह के लोगों को बताया देश का दुश्मन: अपने भाषण के दौरान उन्होंने देश के दुश्मनों का जिक्र करते हुए कहा, ‘सभी राजनीतिक दल राष्ट्रहित के लिए एकसाथ खड़े हों, हमें इसी भावना पर चलना होगा, हमें देश के दुश्मनों के साथ मिलकर लड़ना होगा, देश के मान-सम्मान को चोट पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को बांटने वाले लोग, हमारी संस्कृति से नफरत करने की मानसिकता, ये देश के दुश्मन हैं।’
‘राम से राष्ट्र और देव से देश की संकल्पना को पूरा करेंगे’: वहीं अपनी बात को खत्म करते हुए उन्होंने कहा, ‘आज विजयादशमी के शुभ पर्व पर हमें अपना संकल्प फिर दोहराना है। हमें मां भारती के शत्रुओं को पहचानना होगा, उन्हें परास्त करना होगा, और राष्ट्र प्रथम का संकल्प लेते हुए सबको एकसाथ आना होगा। मुझे विश्वास है कि अयोध्या मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान राम से राष्ट्र और देव से देश की जो संकल्पना हमने की है, उसे हम जरूर पूरा करेंगे।’















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