उत्पन्ना एकादशी आज:बन रहे हस्त नक्षत्र के साथ ये 2 शुभ योग, पूरी होगी हर मनोकामना

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आज 26 नवंबर मंगलवार के दिन चंद्रमा कन्या राशि में ही रहेंगे. आज हस्त नक्षत्र, प्रीति, स्थायीजय योग और उत्पन्ना एकादशी है. आज के दिन एकादशी देवी का प्राकट्य हुआ था, इसलिए जिन लोगों को भी एकादशी व्रत का प्रारंभ करना होता है, वे उत्पन्ना एकादशी से इसकी शुरुआत करते हैं. 

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने में दो एकादशी पड़ती है. साल में पड़ने वाली हर एकादशी व्रत का बहुत महत्व होता है लेकिन मार्गशीर्ष माह में पड़ने वाली एकादशी पर व्रत रखना बहुत ही अहम होता है क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था. उत्पन्ना एकादशी के दिन भगवान विष्णु और एकादशी माता की पूजा की जाती है. तो चलिए पढ़ते हैं उत्पन्ना एकादशी की कथा. 

उत्पन्ना एकादशी की कथा

सतयुग में एक मुर नाम का राक्षस हुआ. अपने ताकत के बल पर इस राक्षस ने देव लोक पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद सभी देवी-देवताओं को देव लोक छोड़कर मृत्यु लोक में जाकर रहना पड़ गया. इस बात से बेहद दुखी होकर स्वर्ग लोग के राजा भगवान इंद्र शिव जी के पास पहुंचे और उन्होंने भगवान से विनती की कि वो कैसे भी कर के भगवानों को उनका लोक वापिस दिला दें. तब भगवान शिव ने कहा कि आपकी इस समस्या का हल भगवान विष्णु कर सकते हैं.  

इसके बाद भगवान इंद्र के साथ सभी देवी-देवता क्षीरसागर पहुंचे और उन्होंने भगवान विष्णु से रक्षा करने की गुहार लगायी.  तब भगवानों को उनका स्थान वापिस दिलाने के लिए भगवान विष्णु चन्द्र-नगरी पहुंच गए जहां उनके और मुर नामक राक्षस के बीच युद्ध शुरू हो गया.  

ये युद्ध 10,000 वर्षों तक चला लेकिन मुर मरा नहीं. इस युद्ध से थक-कर भगवान बद्रिकाश्रम चले गए.  बद्रिकाश्रम में एक बाद सुन्दर गुफ़ा थी जिसका नाम था हेमवती. आराम करने के लिए भगवान गुफा के अंदर चले गए. 12 योजन लंबी इस गुफा का केवल एक ही दरवाज़ा था.  अंदर जाकर भगवान गहरी निद्रा में सो गए. भगवान का पीछा करते हुए राक्षस भी वहां आ पहुंचा और उसने भगवान को मारने का प्रयत्न किया. तभी भगवान के अंदर से उज्जवल, कांतिमय एक देवी का प्राकट्य हुआ. उस देवी ने राक्षस को युद्ध के लिए ललकारा, उससे युद्ध किया और उसे  मौत के घाट उतार दिया. 

जब भगवान विष्णु अपनी गहरी नींद से उठे तब उन्होंने देवी को देखा और सारी बातें जानी. इसके बाद उन्होंने देवी से कहा कि, “हे देवी, एकादशी के दिन आपका जन्म हुआ है इसलिए जगत में आपको एकादशी देवी के नाम से ही जाना और पूजा जाएगा. जो लोग मेरे भक्त हैं वो आपकी पूजा भी पूरे दिल से करेंगे.” और तब से ही एकादशी देवी की व्रत-पूजा का प्रचलन शुरू हो गया.

उत्पन्ना एकादशी पूजन विधि

व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और फिर नए और साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए. साथ ही, इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करिए और अगर आपके मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा पहले से ही हो तो उनके आगे हाथ जोड़कर पूजा की शुरुआत कीजिए. अब भगवान विष्णु की मूर्ति पर तुलसी दल, नवैद्य और फल फूल अर्पित कीजिए. इसके बाद भगवान विष्णु की आरती कीजिए और उसके बाद घर में सभी को प्रसाद बांट दीजिए. उत्पन्ना एकादशी के दिन मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है. कहते हैं कि अगर इस दिन घर में सुंदर-कांड का आयोजन किया जाए तो इसे सभी फलों की प्राप्ति बड़े ही आसानी से हो जाती है. अगले दिन व्रत का पारण करें. 

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