Jaya Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को अति पवित्र माना गया है. एकादशी तिथि का व्रत रखना सभी व्रतों में अति श्रेष्ठ माना गया है जो भगवान विष्णु को व्रत है. माना जाता है कि व्यक्ति इस व्रत का जब सच्चे मन से संकल्प करता है तो उसके सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति इस लोक में सुख से जीवन गुजाकर कर मोक्ष को प्राप्त करता है. आइए जानें इस साल जया एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, शुभ मुहूर्त और योग क्या बन रहे हैं और इस दिन किस किस पूजा विधि से विष्णु जी की आराधना करें.
जया एकादशी की पौराणिक मान्यता: पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत की महिमा के बारे में धर्मराज युधिष्ठिर को श्रीकृष्ण ने बताई थी. उन्होंने बताया कि एकादशी व्रत के प्रभाव से किसी जातक के लिए मोक्ष के द्वार खुल सकते हैं और उसके सभी कार्यों की सिद्धि हो सकती है. दरिद्रता से छुटकारा और अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है. जातक को शत्रुओं से राहत मिलती है और धन, ऐश्वर्य, कीर्ति की प्राप्ति होती है. पितरों का आशीर्वाद मिलेगा.
जया एकादशी पर शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल एकादशी तिथि पर जया एकादशी व्रत रखा जाएगा. एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026 को शाम 04:35 बजे से लेकर 29 जनवरी 2026 को दोपहर 01:55 बजे तक होगी. पंचांग गणना के अनुसार 29 जनवरी 2026 को जया एकादशी व्रत भक्तों द्वारा रखा जाएगा.
जया एकादशी पर शुभ योग: जया एकादशी के दिन भद्रावास के साथ ही रवि योग बन रहा है. इसके साथ ही रवि योग भी बन रहा है जिसमें लक्ष्मी नारायण की एक साथ पूजा की जाएगी. ऐसा करने से भक्त को आरोग्य रहने का वरदान प्राप्त होगा और करियर कारोबार में सफलता के रास्ते खुलेंगे.रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के संयोग में विष्णुजी और मां लक्ष्मी की उपासना करने से भक्त की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होगी.
जया एकादशी पर विष्णु जी की पूजा विधि
➤जया एकादशी के दिन प्रातःकाल में सूर्योदय से पहले उठें और भगवान का ध्यान करें.
➤भगवान विष्णु को प्रणाम करे और घर की सफाई कर स्नान आदि करें.
➤सभी कार्यों से निवृत्त हो जाएं और पीले रंग के कपड़े पहनें.
➤अब पूजाघर समेत पूरे घर में गंगाजल का छोड़काव करें.
➤अब सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और पंचोपचार कर पूजा शुरू करें.
➤विधि-विधान से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें.
➤पूजा के समय भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करें.
➤पीले फूल और फल चढ़ाएं. पीली मिठाई आदि अर्पित करें.
➤अब भगवान के सामने शांत मन से बैठकर विष्णु चालीसा व विष्णु स्तोत्र का पाठ करें.
➤भगवान की आरती कर पूजा का समापन करें और व्रत रखें.
➤शाम में आरती-अर्चना करें और फलाहार लें और रात में भगवान के निमित्ति भजन कीर्तन आदि करें.
➤अगले दिन पूजा अर्चना कर व्रत का पारण करें. जरूरतमंदों में दान आदि करें.
















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