चित्रकूट कोर्ट ने सुनायी प्रेमिका और 4 बच्चों के हत्यारे को फांसी की सजा, पत्नी को उम्रकैद

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चित्रकूट कोर्ट ने प्रेमिका और उसके 4 बच्चों के हत्यारे प्रेमी को फांसी और पत्नी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. दोनों पर 1.10 लाख का जुर्माना भी लगाया. जज ने कहा- ये अपराध रेयर ऑफ रेयरेस्ट है. यह जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है.

छोटे-छोटे बच्चों की इस प्रकार से हत्या अमानवीयता की पराकाष्ठा है. ऐसे जघन्य अपराध के लिए मौत से कम सजा नहीं हो सकती है. आरोपी की पत्नी को महिला मानते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई जा रही है. गुरुवार को एडीजे-1 अनुराग कुरील की कोर्ट ने ये फैसला सुनाया. इसके बाद आरोपी अवधेश कुमार यादव और उसकी पत्नी कुसुम देवी को जिला जेल ले जाया गया.

सजा के बाद आरोपी पति-पत्नी को पकड़कर पुलिस वापस जेल ले गई.

राजापुर थाना क्षेत्र के अमान गांव में 25 अप्रैल 2017 को गांव के तालाब के पास 3 बोरियां मिलीं. मौके पर पहुंची पुलिस ने बोरियों को खोला, तो उसमें एक महिला और 4 बच्चों की लाश मिली. सबके गले पर गहरा घाव था. ऐसा लग रहा था कि बेरहमी से गर्दन रेतकर हत्या की गई है.

शवों की पहचान गुजरात में रहने वाली बिहार मूल की लालमुनि और उसके 4 बच्चों गीता, संगीता, गौरी और किशन के रूप में हुई थी. जांच में सामने आया कि लालमुनि का संबंध चित्रकूट के सिकरी अमान गांव के निवासी अवधेश यादव से था.

दोनों की मुलाकात गुजरात के भुज में हुई थी जहां अवधेश प्राइवेट नौकरी करता था. अवैध संबंधों के चलते अवधेश उसे अपने गांव ले आया. पर उसकी पत्नी कुसुम देवी ने इस पर आपत्ति जताई.

कुछ दिन साथ रखने के बाद अवधेश को भी लालमुनि बोझ लगने लगी. उसने रिश्ता तोड़ना चाहा, पर लालमुनि ने इससे इनकार कर दिया. इसके बाद अवधेश ने अपनी पत्नी कुसुम के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची.

हत्या की रात सब्जी काटने वाले चाकू से कत्लेआम: कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, अवधेश और उसकी पत्नी कुसुम देवी ने लालमुनि और उसके चारों बच्चों को सोते समय मारा था. सोते वक्त सब्जी काटने वाले चाकू से पहले लालमुनि का गला रेता. इसके बाद एक-एक कर चारों बच्चों का भी गला रेत दिया. इसके बाद शवों को बोरियों में भरकर गांव के तालाब में फेंक दिया था. एक रिश्तेदार ने उन्हें शव फेंकते हुए देख लिया था, जो बाद में केस में गवाह बना.

घटनास्थल पर मिला था अवधेश का आधार कार्ड: पुलिस को घटनास्थल से एक झूले पर अवधेश का पैन कार्ड और आधार कार्ड मिला था. इस सुराग के आधार पर पुलिस ने अवधेश के घर दबिश दी, लेकिन वह पत्नी समेत फरार मिला. पुलिस ने तत्कालीन डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी के निर्देश पर एक टीम गुजरात भेजी. वहां से अवधेश और उसकी पत्नी कुसुम देवी को गिरफ्तार किया गया.

5 साल तक गवाही के लिए नहीं आया पति: सरकारी वकील अजय सिंह ने बताया- यह मामला बेहद संवेदनशील है. मृतिका का पति इस कदर डरा हुआ था कि 5 साल तक कोर्ट में गवाही देने नहीं आया. वकील ने पुलिस अधीक्षक से अनुरोध कर कड़ी सुरक्षा में गवाही करवाई. कोर्ट ने सभी गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अवधेश को फांसी और कुसुम को उम्रकैद की सजा दी है.

परिजन ने कहा- अब आत्मा को शांति मिली: मृतकों के परिजनों ने फैसले के बाद कोर्ट का आभार जताया. कहा- आज महिला और उसके बच्चों की आत्मा को शांति मिली होगी. इतनी निर्मम हत्या करने वालों को सजा मिली, इससे न्यायपालिका के प्रति उनका भरोसा और मजबूत हुआ.

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