गणेश महोत्सव आज से शुरू: स्‍थापना का सबसे सटीक समय, शुभ मुहूर्त में राहु काल का अड़ंगा

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आज से गणेश महोत्सव का शुभारंभ हो रहा है. इस वर्ष यह पर्व 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी से लेकर 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाएगा. गणेश चतुर्थी का बुधवार को पड़ना बहुत शुभ माना जाता है क्‍योंकि यह तिथि और दिन दोनों ही विघ्‍नहर्ता गणेश को समर्पित हैं. आज गणेश चतुर्थी पर रवि योग, प्रीति योग, नवपंचम योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं. 

गणेश चतुर्थी के दिन घरों और मंदिरों में भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस 10 दिवसीय महोत्सव में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. आइए जानते हैं कि गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है और इसकी स्थापना की सही विधि क्या है.

भगवान गणेश की स्थापना और पूजा का मुहूर्त: वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त 2025 को दोपहर 1:53 बजे से लेकर 27 अगस्त को दोपहर 3:43 बजे तक रहेगी. उदिया तिथि के आधार पर गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त यानी आज मनाया जाएगा. इस दौरान गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 01 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 40 मिनट तक रहने वाला है. इसके बाद, दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 05 मिनट तक रहेगा. गणपति की पूजा का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर में 1 बजकर 40 मिनट तक है.

स्‍थापना का सबसे सटीक समय: धर्म-शास्‍त्रों के अनुसार भगवान गणेश का जन्‍म दोपहर 12 के आसपास हुआ था इसलिए गणेश चतुर्थी पर पूजन के लिए सबसे शुभ समय दोपहर का ही माना जाता है. इस साल गणेश चतुर्थी पर गणेश स्‍थापना और पूजा का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. यानी कि पूजन के लिए शुभ समय 02 घंटे 34 मिनट का है.

शुभ मुहूर्त के बीच राहु काल का अड़ंगा: राहुकाल और भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना गया है. आज राहु काल दोपहर 12:22 से 13:59 तक रहेगा. बेहतर है कि गणेश स्‍थापना दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से पहले ही कर दें. वहीं आज चंद्रोदय समय सुबह 09 बजकर 28 मिनट पर और चंद्रास्त- 27 अगस्त को रात 9 बजकर 8 मिनट पर है. गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन वर्जित है. यदि गलती से गणेश चतुर्थी पर चांद दिख जाए चांद तो इस मंत्र का जाप करें, वरना झूठा कलंक लगने का खतरा रहता है. मंत्र- ‘सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥’

गणेश स्थापना पूजा विधि : सबसे पहले घर के पूजा स्थान को अच्छे से साफ करें और उसे फूल, रंगोली व सजावटी वस्तुओं से सुंदर बनाएं. शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा को एक वेदी (चौकी) पर स्थापित करें. वेदी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाएं. पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल, अक्षत (चावल) और फूल लेकर व्रत व पूजा का संकल्प करें.  ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करते हुए गणपति बाप्पा का आह्वान करें. भगवान की प्रतिमा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें नए वस्त्र, पुष्प और आभूषण पहनाएं. गणेश जी को उनका प्रिय भोग मोदक और लड्डू चढ़ाएं. साथ ही दूर्वा घास और लाल फूल.

गणेश चतुर्थी 2025 पूजा विधि: प्रातःकाल स्नान कर पूजा स्थल को स्वच्छ करें. शुभ मुहूर्त में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में चौकी स्थापित करें. चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा विराजमान करें. मूर्ति शुद्ध सामग्री जैसे पीतल, कांस्य, लकड़ी या पत्थर से बनी होनी चाहिए. विधिपूर्वक गणपति की पूजा-अर्चना करें. प्रतिदिन गणेश जी की उपासना करते रहें. अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति विसर्जन करें.

गणपति जी का भोग

लड्डू – गणेश जी को लड्डू अर्पित करना शुभ माना जाता है. आप बेसन या बूंदी के लड्डू चढ़ा सकते हैं.
मोदक – गणेश जी का प्रिय भोग मोदक है.  पुराणों में इस बात का जिक्र है कि बचपन में गणेश जी अपनी माता पार्वती द्वारा बनाए गए मोदक तुरंत ही खा जाते थे.

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