आज गुरु प्रदोष है. आज के दिन देवाधिदेव महादेव की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शिव जी की पूजा प्रदोष काल में करने से वह बहुत ही प्रसन्न होते हैं. त्रयोदशी प्रदोष काल की तिथि हर महीने में दो बार आती है एक कृष्ण पक्ष जबकि दूसरा शुक्ल पक्ष के दौरान. प्रदोष काल हो और तिथि त्रयोदशी की तो वह बहुत ही शुभ माना जाता है. प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहले शुरू होकर सूर्यास्त के बाद 45 मिनट बाद तक माना जाता है.
आज है गुरु प्रदोष
गुरु प्रदोष को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यह शत्रु विनाशक, पित्र तृप्ति, भक्ति वृद्धि का कारण होता है. आज जो प्रदोष व्रत है वह गुरु प्रदोष है. क्योंकि जब प्रदोष का दिन सोमवार होता है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं, उसी तरह मंगलवार के दिन होने पर भौम प्रदोष जबकि शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को शनि प्रदोष कहते हैं.
भगवान शिव को समर्पित है यह तिथि
यूं तो त्रयोदशी तिथि ही भगवान शिव को समर्पित है. लेकिन त्रयोदशी तिथि हो और काल प्रदोष का हो तो उस वक्त भगवान शिव की पूजा करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदोष का काल अलग-अलग शहरों में अलग-अलग समय होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि सभी शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग-अलग होता है.
भगवान शिव की होती है पूजा
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक त्रयोदशी प्रदोष भगवान शिव का सबसे पसंदीदा दिन माना जाता है. इस दिन शिव के भक्त व्रत रखते हैं और अपने आराध्य की पूजा करते हैं. इसके अलावा भजन-कीर्तन के साथ-साथ गौरी-शंकर मंदिर में भगवान शिव की आराधना करते हैं. कुछ भक्त इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक भी करते हैं.
















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