आज करें मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, नवरात्र में राहु-केतु दोष दूर करने के ये सटीक उपाय

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आज 23 सितंबर को ब्रह्मचारिणी की आराधना का दिन है. आश्वीन शुक्ल द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना करने का विधान है. ऐसे में आइए जानें माता ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कैसा है, किसी मंत्रों के जा से माता को प्रसन्न किया जा सकता है. इस कड़ी में इन बातों के साथ ही ये भी जानेंगे कि माता को कौन से भोग अति प्रिय हैं और माता की पूजा की विधि क्या है.

सनातन धर्म में नवरात्र के दिनों को अति पवित्र माना जाता है. जगत जननी मां आदिशक्ति के आराधना के दिनों में अगर कुछ उपाय कर लें तो जीवन की दिक्कतों का निवारण हो सकता है. राहु-केतु का दोष अगर जीवन में अनेक बाधाएं ला रहा है और संकट खत्म नहीं हो रहे हैं तो कार्तिक माह की शारदीय नवरात्रि में कुछ विशेष उपाय कर सकते हैं. इस कड़ी में हम जानेंगे कि आखिर किन उपायों से राहु और केतु के बुरे प्रभावों को दूर किया जा सकता है.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

➤मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए बैठें.
➤सबसे पहले माता का ध्यान करते हुए हाथ में फूल लें और मंत्र उच्चारण व प्रार्थना करें.
➤देवी मां पंचामृत से स्नान कराकर उनको कुमकुम, अक्षत व फूल अर्पित करें.
➤मां को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाकर उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं.
➤देवी मां को उनके प्रिय भोग अर्पित करें. पान-सुपारी अर्पित करें.
➤घी का दीया जलाकर और कपूर जलाकर आरती करें ताकि पूजा संपन्न हो सके.
➤अंत में भूल चूक के लिए माता से क्षमा मांगे और प्रसाद को भक्तों में बांटें.

मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र

ये है मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
“ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:”

इस मंत्र का करें जाप

“ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते।”

यह मंत्र है अति शुभ फलदायी
“या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।”

इस मंत्र का करें सच्चे मन से जाप
“दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।”

राहु केतु दोष की पहचान: ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु पापी ग्रह माने गए हैं. कुंडली के जिस भाव में ये दोनों होते हैं अशुभ फल जेते हैं. खराब राहु बुद्धि को भ्रष्ट करता है, वहीं खराब केतु जातक को बिना सोचे-समझे काम करने के लिए प्रेरित करता है. इन दोनों ग्रहों के खराब होने से जीवन में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. राहु का ज्ञानेन्द्रियों का कारक है और केतु कर्मेन्द्रियों का कारक है.

राहु केतु के अशुभ प्रभाव कैसे कम होंगा: मान्यताएं हैं कि मां दुर्गा की जो भी भक्त उपासना करता है उसकी कुंडली से राहु-केतु का दोष को दूर हो जाता है. नवरात्रि के दिनों में माता के सामने बैठकर  दुर्गा सप्तशती का पाठ का जाप करने वाले भक्त को राहु केतु कभी परेशान नहीं करता है. इसके साथ ही हर दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करने से राहु और केतु जैसे अशुभ प्रभाव भी कम से कम होने लगता है.

किन देवियों की पूजा करें: ज्योतिष अनुसार मां ब्रह्मचारिणी और मां चंद्रघंटा की विधि विधान से पूजा-अर्चना करने से भक्त पर राहु और केतु का दोष नहीं लगता है. ऐसे में माता के इन दो स्वरूपों की पूजाकर राहु और केतु के बुरे प्रभावों से छुटकारा पाएं. 

शारदीय नवरात्र में माता की आराधना: अगर शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के साथ ही महादेव और हनुमान जी की पूजा करें तो राहु केतु नहीं सताएंगे. शिव सहस्त्रनाम और हनुमान सहस्त्रनाम का पाठ परेशानियों को दूर कर सकता है. 

राहु केतु के बुरे प्रभावों को दूर करने का उपाय: राहु दोष से मुक्ति पाना है तो नवरात्रि में चांदी से बनी हाथी की प्रतिमा घर लेकर आएं और पूजा घर या तिजोरी में रख दें. हर दिन इस मूर्ति के दर्शन करें. इस एक आसान उपाय को करने से राहु के बुरे प्रभाव दूर हो जाएंगे.

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