प्रदोष व्रत के दिन अगर देवों के देव महादेव की विशेष पूजा आराधना करें तो जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिल सकती है. वहीं अगर शनि प्रदोष व्रत का शुभ संयोग हो रहा है तो यह व्रत और भी अधिक प्रभावशाली हो जाता है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत अगर शनिवार के दिन पड़े तो इसे शनि प्रदोष व्रत के रूप में जाना जाता है. इस दिन व्रत और पूजाकर शिव जी की कृपा तो पाई जा सकती है साथ ही शनिदोष भी दूर हो सकता है. जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है और मेहनत का पूरा फल प्राप्त होगा. अक्टूबर का पहला शनि प्रदोष आज 4 अक्टूबर 2025 को रखा जा रहा है, प्रदोष व्रत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है. शनि दोष से मुक्ति के लिए आइए कुछ उपायों के बारे में जानें.
न्याय और दंड के अधिपति शनि देव स्वयं भगवान शिव के शिष्य हैं. वो शिवजी ही थे जिन्होंने शनि को न्याय और दंड विधान का अधिकार सौंपा था. इसलिए कहा भी जाता है कि यदि भगवान शिव की आराधना की जाए तो शनि द्वारा दिए जाने वाले कष्टों से स्वत: ही मुक्ति मिल जाती है. 4 अक्टूबर यानी कल आश्विन मास का आखिरी प्रदोष व्रत है. इस दिन भगवान शिव और शनि देवी की विधिवत उपासना बेहद लाभकारी हो सकती है. लेकिन इस दिन 5 गलतियां भूलकर भी न करें.
शनि प्रदोष पूजा के विशेष लाभ संतान संबंधी समस्याओं से निजात पाने के लिए यह पूजा अत्यंत लाभकारी मानी जाती है. शनि की दशा या अन्य पीड़ा से जूझ रहे व्यक्तियों को भी इस दिन पूजा से बड़ा लाभ मिलता है. यदि आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव में हैं, तो इस दिन विधिवत पूजा से आपकी समस्या दूर हो सकती है. धनधान्य से जुड़ी समस्या को भी दूर किया जा सकता है.

सरल पूजा विधि: शनि प्रदोष के दिन सुबह स्नानादि के बाद भगवान शिव की पूजा आरंभ करें. शिवलिंग पर जल व बेलपत्र अर्पित करें. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें. इसके बाद पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करें. फिर शनि देव के मूल मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का 108 बार जाप करें. इसके बाद किसी गरीब आदमी को खाने या इस्तेमाल की जाने वाली वस्तु का दान करें.
शनि प्रदोष में न करें ये गलतियां
- शनि प्रदोष के दिन पवित्रता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. इस दिन घर के मुख्य द्वार और मंदिर के आस-पास साफ-सफाई रखें.
- इस दिन घर की सफाई के साथ-साथ मन की सफाई पर भी ध्यान दें. अपने मन में किसी भी प्रकार के गलत विचार न आने दें.
- घर में सभी सदस्यों से आदरपूर्वक बात करें. बड़ों का अपमान न करें. दूसरों के प्रति मन में घृणा या द्वेष बिल्कुल न रखें.
- पेड़-पौधों को तोड़ने से बचें. जीव-जन्तुओं को हानि न पहुंचाएं. ऐसा करने वालों से शनि देव रुष्ट हो सकते हैं.
- इस दिन नाखून या बाल कटवाने से बचें. मांस-मदिरा का सेवन न करें. सात्विकता का पूर्ण ख्याल रखें.
इस उपाय से शनिदोष होगा दूर: शनि प्रदोष व्रत पर काले तिल के साथ ही सरसों के तेल का अगर जरूरतमंदों में दान करें तो इससे कई परेशानियों का अंत हो सकता है. शनिदेव क्रूर दृष्टि से राहत मिल सकती है. शनि दोष को दूर करने के लिए भी यह एक बहुत कारगर उपाय है. इस उपाय को करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है.
सुख-शांति पाने के लिए उपाय: शनि प्रदोष व्रत पर महादेव की पूजा अर्चना करें और शनि देव की भी आराधना करें. इस दिन अगर काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें तो इसके शुभ परिणाम जल्द दिखने लगेंगे. वहीं शनिदेव की पूजा में नीले रंग के फूल चढ़ाएं. इस छोटे से उपाय को करने से शनि देव अति प्रसन्न होंगे और जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी. वहीं महादेव की कृपा भी प्राप्त होगी.
मंत्र जाप का अचूक उपाय: शनि प्रदोष व्रत पर अगर कोई उपाय नहीं भी करना हो तो शनि दोष को दूर करने और शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिदेव के कुछ प्रभावशाली मंत्रों का जाप करें. इसके कई शुभ प्रभाव व सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं. आइए शनिदेव के कुछ मंत्रों को अभी जानें.
इस मंत्र का जाप कर शनिदेव को करें प्रसन्न- “ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः”
शनि देव का यह मंत्र है प्रभावशाली- “ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये।”
शनिदोष को दूर करेगा शनिदेव का यह मंत्र- “ऊँ शं शनैश्चाराय नमः”
शनिदेव के इस मंत्र को शनि प्रदोष व्रत पर करें जाप- “नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।”
















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