कानपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन: वकील बोले- ‘हम हड़ताल नहीं सत्याग्रह करते, उसे रोक नहीं सकते’

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कानपुर कचहरी में बार और लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर आज दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन की शुरुआत हुई. सम्मेलन में दोपहर तक गोरखपुर, मुरादाबाद, भोगनीपुर, बाराबंकी, लखनऊ, मेरठ के बार संघों के पदाधिकारी व अधिवक्ता शिरकत करने पहुंचे.

सम्मेलन में अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट, वरिष्ठ अधिवक्ताओं को पेंशन, वकीलों के मुकदमे गैर जनपद ट्रांसफर करने और हड़ताल की अंडरटेकिंग न देने जैसे मुद्दे प्रमुख रुप से हावी रहे.

सम्मेलन का शुभारंभ बार के अध्यक्ष योगेंद्र अवस्थी, महामंत्री बिनय मिश्रा, लॉयर्स एसोसिएशन के अधक्ष दिनेश वर्मा व महामंत्री राजीव यादव ने किया। जिसके बाद जिले के विभिन्न जनपदों के आए पदाधिकारियों ने अपने–अपने विचार रखे.

भदोही में सम्मेलन में आए बार महामंत्री सुरजीत सिंह ने कहा अधिवक्ताओं को शासन से सहयोग नहीं मिल रहा है. 2019 में कोर्ट की नई बिल्डिंग ट्रांसफर की गई, जहां अधिवक्ताओं के बैठने तक की व्यवस्था नहीं की गई. चार बार शासन को पत्राचार भी किया गया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं की गई.

करीम सिद्दीकी ने शेर पढ़ा-ये दो–चार, दस की नहीं हजारों की बात है: वरिष्ठ अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने उठो आगे बढ़ो, प्रदेश के वकीलों… ये दो–चार, दस की नहीं हजारों की बात है… शेर पढ़कर अपने संबोधन की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर खतरा बढ़ता जा रहा है.

उन्होंने कहा कि एडवोकेट एक्ट में अधिवक्ताओं को ऑफीसर ऑफ कोर्ट कहा गया है, अधिवक्ताओं को अदालत का अधिकारी तो बना दिया गया, लेकिन उनको इस पद का आज तक अहसास भी नहीं हुआ.

यह हड़ताल नहीं, सत्याग्रह है: उन्होंने कहा कि जब हम हड़ताल करते हैं तो अपनी रोजी-रोटी बंद कर देते है. यह हड़ताल नहीं सत्याग्रह है, सत्याग्रह करना हमारा संवैधानिक अधिकार है और उसे रोका नहीं जा सकता है. सम्मेलन में शामिल अधिवक्ताओं ने कहा कि जब बार संघ और अधिवक्ता समाज कमजोर होता है, न्यायिक व्यवस्थाएं हावी हो जाती हैं.

सम्मेलन में बार व लॉयर्स के पदाधिकारियों ने मांग करते हुए कहा कि देश व प्रदेश के सभी अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान के लिए अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम संसद में विशेष सत्र बुलाकर पारित किया जाए. सुप्रीम कोर्ट और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा अधिवक्ताओं को हड़ताल से विरत रहने के लिए अंडरटेकिंग दिए जाने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, यह आदेश वकीलों की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है.

मुकदमा दर्ज होने पर लाइसेंस सस्पेंड करना गलत: वकीलों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद उनका लाइसेंस सस्पेंड करना गलत है. इसके साथ ही कानपुर बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मो. तौहीद ने यूपी सरकार से मांग रखते हुए कहा कि प्रदेश में अधिवक्ता कल्याण की राशि पांच लाख से बढ़ाकर 25 लाख की जाए.

नए अधिवक्ताओं को पांच वर्ष तक भत्ता स्टाईपेंड दिया जाए. 70 वर्ष से अधिक उम्र के अधिवक्ताओं को पेंशन का लाभ दिया जाए. अधिवक्ताओं के बैठने के लिए चैंबर्स की व्यवस्था की जाए.

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