कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में बाढ़ के पानी से उफनाई पांडु नहर में कार पलटने से दो युवकों की मौत हो गई. बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजनों ने हादसे के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए. उनका कहना था कि नहर का पानी सड़क के ऊपर तक भर गया था और सड़क और नहर का अंतर तक दिखाई नहीं दे रहा था.
इसके बावजूद न तो मौके पर बैरिकेडिंग की गई और न ही रास्ता बंद कराया गया. सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी भी तैनात नहीं किए गए. परिजनों का आरोप है कि प्रशासन की इसी लापरवाही ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए.
हादसे में सुरार गांव निवासी दीपक पाण्डेय (28) और उसके दोस्त अंकित कमल (28) की मौत हुई है. दोनों सोलर पैनल लगाने का काम करते थे. मंगलवार देर रात नहर में डूबी कार मिलने के बाद पुलिस ने स्टीमर और गोताखोरों की मदद से दोनों युवकों के शव कार से करीब 200 मीटर दूर से बरामद किए थे.
वहीं पोस्टमार्टम हाउस में दोनों की बिना कपड़ों के बॉडी देने पर परिवार के लोगों ने हंगामा किया. परिवार के लोगों ने कहा- पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी बॉडी में पैक करने के लिए 5 हजार रुपए मांग रहे हैं.

ग्रामीणों ने नहर में डूबी कार देखी तो खुला हादसे का राज: मंगलवार देर रात करीब साढ़े दस बजे ग्रामीणों की नजर नहर में डूबी एक कार पर पड़ी. ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। सचेंडी पुलिस मौके पर पहुंची और क्रेन की मदद से कार को बाहर निकलवाया. कार की पहचान अंकित की होने पर पुलिस ने परिजनों को सूचना दी.
जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे. नहर में कार देखकर उनके होश उड़ गए. दोनों युवकों के शव तत्काल बरामद न होने पर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सड़क पर बैठकर हंगामा शुरू कर दिया. परिजनों ने पुलिस-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते खोजबीन और बचाव कार्य तेज किया जाता तो शायद युवकों की जान बच सकती थी.
‘बैरिकेडिंग होती तो नहीं होता हादसा’: बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे मृतकों के परिजनों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई. उनका कहना था कि नहर में बाढ़ का पानी सड़क के ऊपर से बह रहा था. पानी इतना अधिक था कि सड़क और नहर का पता ही नहीं चल रहा था. इसके बावजूद प्रशासन ने वहां बैरिकेडिंग नहीं कराई और न ही आवागमन रोकने के लिए कोई इंतजाम किया.

परिजनों ने आरोप लगाया कि बाढ़ की स्थिति पहले से बनी हुई थी, इसके बावजूद खतरनाक स्थान पर न तो चेतावनी बोर्ड लगाया गया और न ही पुलिसकर्मी तैनात किए गए. यदि समय रहते रास्ता बंद कर दिया जाता या बैरिकेडिंग कर दी जाती तो दोनों युवक कार लेकर वहां नहीं पहुंचते और यह हादसा टल सकता था.
शव रखकर नौकरी और मुआवजे की मांग: हादसे के बाद परिजनों ने मृतकों के परिवार को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग की. उनका कहना था कि दोनों परिवारों की जिम्मेदारी युवकों पर थी। अचानक हुई मौत से परिवारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है.
एसडीएम सदर अभिनव सिंह ने परिजनों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और नियमानुसार सरकारी नौकरी व उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए.
पोस्टमार्टम हाउस में बिना कपड़ों के बॉडी देने पर परिजनों का हंगामा: दोनों शवो के पोस्टमार्टम होने के बाद बॉडी बिना कपड़े में लिपटा देने पर परिजन भड़क गए। परिजनों ने पैसा मांगे जाने का आरोप लगाते हुए पोस्टमार्टम हाउस में जमकर हंगामा काटा. परिजनों ने कहा- कर्मचारियों ने पोस्टमार्टम प्रोसेस का पूरा सामान बाहर से मंगवाया. फिर 5 हजार रुपए मांगे। कहा- रुपए तो तभी बॉडी पैक करके देंगे। वरना बॉडी अपने हाथ से पैक करके ले जाओ. वहीं हंगामे की सूचना मिलते ही स्वरूप नगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया.
आखिर इन सवालों के कौन देगा जवाब? दो मौतों ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं. जब नहर का पानी सड़क पर चढ़ चुका था और रास्ता जानलेवा हो गया था, तो वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? बैरिकेडिंग और रास्ता बंद करने की कार्रवाई समय रहते क्यों नहीं हुई? अब हादसे के बाद इन सवालों के जवाब जिम्मेदार अधिकारियों से मांगे जा रहे हैं.
















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