इंदिरा एकादशी आज: जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और खास उपाय; जरूर पढ़ें ये कथा

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पितृ पक्ष का समय बहुत ही शुभ माना जाता है और अगर पितृपक्ष में इंदिरा एकादशी आ जाए तो ये अवसर और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. हिंदू धर्म शास्त्रों में शरीर और मन को संतुलित करने के लिए व्रत और उपवास के नियम बनाए गए हैं. इन सभी व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण एकादशी का व्रत माना जाता है. एकादशी महीने में दो बार आती है- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष. 

आश्विन के महीने में जो एकादशी आती है उसे कहते हैं इंदिरा एकादशी कहते हैं. इसका एकादशी का पालन करने से मन और शरीर दोनों ही संतुलित रहते हैं. खास तौर से गंभीर रोगों से निश्चित रूप से रक्षा होती है. पाप नाश करने के लिए और अपनी तमाम मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आश्विन महीने की इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व है. अगर आप इंदिरा एकादशी का व्रत रखते हैं तो इससे पापों का नाश तो होता ही है, साथ ही पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है. 28 सितंबर यानी आज इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. 

इंदिरा एकादशी शुभ मुहूर्त

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 27 सितंबर यानी कल दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 28 सितंबर यानी आज दोपहर 2 बजकर 49 मिनट पर होगा. 

पारण का समय- 29 सितंबर यानी कल सुबह 6 बजकर 13 मिनट से 8 बजकर 36 मिनट तक

इंदिरा एकादशी पूजन विधि

इस दिन प्रातःकाल उठ कर के स्नान करें और स्नान करने के बाद पहले सूर्य भगवान को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की आराधना करें. भगवान विष्णु की पाषाण रूप में शालिग्राम के रूप में पूजा होती है और उसी स्वरूप की पूजा आज के दिन की जाएगी. फिर, उनको पीले फूल, फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करेंगे तो बहुत ही अच्छा रहेगा. इसके बाद भगवान का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जप करें. 

मंत्र है- ऊं विष्णवे नमः, ऊं नमो नारायणाय:, ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: 

इंदिरा एकादशी की कथा

महिष्मतिपुर के राजा इंद्रसेन एक बेहद ही धर्म प्रिय राजा हुआ करते थे. साथ ही वह भगवान विष्णु के भी बहुत बड़े भक्त थे. एक दिन नारद मुनि उनके दरबार में आए. राजा ने पूरी खुशी से उनकी सेवा की और फिर उनके आने का कारण पूछा. देवर्षि नारद ने बताया कि, ‘मैं यमलोक गया था जहां पर मैंने आपके पिता को देखा.’ नारद जी ने आगे बताया कि, व्रत भंग होने के दोष के चलते आपके पिता को यमलोक में यातनाएं झेलने पड़ रही हैं, इसलिए उन्होंने आपके लिए संदेश भेजा है कि, आप इंदिरा एकादशी का व्रत करें. ताकि वह स्वर्ग लोक को प्राप्त कर सकें. 

तब राजा ने पूछा कि यह व्रत कैसे किया जा सकता है? नारद मुनि ने उन्हें बताया कि आश्विन मास की एकादशी में पितरों के लिए एकादशी का व्रत किया जाता है. इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए सच्चे मन से पूजा अर्चना करनी चाहिए. पितरों को भोजन और गायों को भोजन कराना चाहिए. फिर भाई, बंधु, नाती, पोते, पुत्र, को भोजन कराकर मौन धारण करके भोजन करना चाहिए. इससे आपके पूर्वजों को शांति मिलती है. इसके बाद आश्विन कृष्ण एकादशी को इंद्रसेन ने बताई गई विधि के अनुसार एकादशी व्रत का पालन किया जिससे उनके पिता की आत्मा को शांति मिली और मृत्यु के बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई.

कहा जाता है कि इंदिरा एकादशी की जो कथा हमने आपको बताई है इसके सुनने मात्र से ही वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. इस प्रकार नियमपूर्वक शालिग्राम की मूर्ति के आगे विधिपूर्वक श्राद्ध करके योग्य ब्राह्मण को फलाहार का भोजन करवायें और फिर अपनी यथाशक्ति से उन्हें दक्षिणादि से प्रसन्न करें. धूप, दीप, गंध, पुष्प, नैवेद्य आदि से भगवान ऋषिकेश की पूजा करें. रात्रि में प्रभु का जागरण करें व द्वादशी के दिन प्रात:काल भगवान की पूजा करके ब्राह्मण को भोजन करवाकर सपरिवार भोजन करें.

इंदिरा एकादशी पर न करें ये काम

1. अपने मन को ईश्वर में लगाएं.   

2. क्रोध न करें और असत्य न बोलें. 

इंदिरा एकादशी का महाप्रयोग

एकादशी के दिन उड़द की दाल, उड़द के बड़े और पूरियां बनाएं. फिर, एक कंडा जलाकर उसपर पूरी रखें, साथ ही उसमें उड़द की दाल और उड़द के बड़े की आहुति दें. पास में एक जल से भरा पात्र भी रखें. फिर गीता का पाठ करें. 

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