‘कटेंगे तो बंटेंगे’ ने कर दिया भाजपा के पक्ष में वोटरों को एक! महाराष्ट्र के नतीजे बढ़ाएंगे योगी का कद

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के रुझानों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बड़ा बहुमत मिलता दिख रहा है. वहीं कांग्रेस, उद्धव ठाकरे और शरद पवार का महाविकास अघाड़ी गठबंधन काफी पीछे दिख रहा है. हालात यह हैं कि रुझान भाजपा और उसके सहयोगी दलों की लहर दिखा रहे हैं, जबकि शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के लिए निराशा नजर आ रही है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में शायद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का नारा कटेंगे तो बंटेंगे का असर दिखा है. सीएम योगी ने कई रैलियों में यह नारा उठाया था और इसकी खूब चर्चा हुई थी.

माना जा रहा है कि इस नारे का असर हुआ है और जमकर पोलराइजेशन देखने को मिला है. इस नारे का असर ऐसा था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने भी अलग स्वर में ही सही, लेकिन एक हैं तो सेफ हैं कि बात कही थी, जो एक तरह से इसी नारे का विस्तार था. अब तक आए रुझानों में भाजपा को विदर्भ के अलावा मुंबई, पश्चिम महाराष्ट्र जैसे इलाकों में भी बढ़त मिली है. यह उसके लिए राहत की बात है. खासतौर पर तब जबकि तमाम एग्जिट पोल्स में टाइट फाइट की बात कही जा रही थी. यही नहीं 4 जून को ही आए लोकसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा को करारा झटका लगा था। माना जा रहा था कि यदि वही रुझान जनता का रहा तो महाविकास अघाड़ी को बड़ी जीत मिल सकती है.

अब सारे कयास ही गलत साबित हो रहे हैं और भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों ने बड़ी सफलता हासिल की है. दरअसल लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी के दलों ने आरक्षण छिनने और संविधान बदले जाने का प्रचार किया था. माना गया था कि उसके चलते उन्हें इलेक्शन में फायदा हुआ है. वहीं महायुति ने इस बार पहले ही प्लानिंग की। कई जातियों को ओबीसी की सूची में शामिल किया गया. इसके अलावा टिकट बंटवारे में भी उनका ख्याल रखा गया. यही नहीं चुनाव से कुछ महीने पहले ही घोषित लड़की बहिन योजना का भी असर माना जा रहा है.

डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने तो पहले ही कहा था कि राज्य में बढ़ा हुआ वोट हमारे पक्ष में है. उनका कहना था कि इतिहास बताता है कि जब भी वोट प्रतिशत बढ़ा है तो हमें ही फायदा हुआ है. फडणवीस ने कहा था कि लड़की बहिन योजना को लोगों ने पसंद किया है और उसके समर्थन में लोग बाहर निकल रहे हैं. महाराष्ट्र में इस बार योगी आदित्यनाथ की बहुत ज्यादा सक्रियता थी. उन्होंने उन इलाकों में कई सभाएं की थीं, जहां यूपी और बिहार के रहने वाले लोगों की अधिक संख्या है.

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