यूजीसी के नए नियमों को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अंदर भी रार दिखने लगी है. ताजा बयान पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र का आया है जिन्होंने नए नियमों को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है. कलराज मिश्र ने कहा है कि यह पूर्णत:असंवैधानिक है. इसको वापस लेना चाहिए. एससी-एसटी के भेदभाव पर वे शिकायत कर सकते थे, करते थे, 2012 के अंतर्गत जो गाइडलाइन थी उसमें यह था, अब इसमें ओबीसी को भी जोड़ा गया है. हमारा कहना है कि इसमें अलग-अलग जाति के आधार की बजाए सभी लोगों को अधिकार देना चाहिए कि जिसके खिलाफ भी भेदभाव हो रहा है वो शिकायत कर सके. दूसरे इसमें झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी दंड का प्रावधान होना चाहिए जो अभी नहीं है.
बता दें कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ इस समय सोशल मीडिया पर तूफान मचा हुआ है और देश की सियायत भी गरमा रही है. शहर-शहर इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. ये नियम यूजीसी ने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने का हवाला देते हुए तैयार किए हैं लेकिन इनको लेकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है.
दो दिन पहले बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस मुद्दे पर काफी मुखर ढंग से अपनी बात रखी. उधर, यूजीसी के नियमों के विरोध के बीच प्रदर्शनकारी सामान्य वर्ग के जनप्रतिनिधियों के ऊपर लगातार दबाव भी बना रहे हैं कि वे अपना स्टैंड साफ करें. हालांकि अब तक बहुत कम राजनीतिकों ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है. भाजपा के साथ विपक्ष के नेता भी इस विषय पर कुछ नहीं बोल रहे हैं.
इस बीच बुधवार को कलराज मिश्र जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल का बयान सामने आने से यूजीसी के नए नियमों का विरोध कर रहे लोगों को एक नई ताकत मिली है। कलराज मिश्र भाजपा के कद्दावर नेताओं में से हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर जिस तरह स्पष्ट ढंग से अपनी बात रखी है उसकी काफी चर्चा हो रही है. कलराज मिश्र ने दो टूक कहा है कि ये नियम पूरी तरह असंवैधानिक हैं और सरकार को इन्हें वापस लेना चाहिए.
















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