श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. श्रावण मास में श्री हरि की पूजा अत्यंत फलदायी होती है. इसका पालन करने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है. कामिका एकादशी व्रत का प्रभाव मन और शरीर पर सीधा पड़ता है. ऐसी मान्यता है कि एकादशी का व्रत विधि विधान से रखने पर प्राणी सभी दुखों से मुक्त होता है. इस बार कामिका एकादशी का व्रत 31 जुलाई यानी कल रखा जाएगा.
कामिका एकादशी क्यों है खास?
कामिका एकादशी पर भगवान शिव और श्री विष्णु दोनों की कृपा मिलती है. इसके अलावा सावन के गुरुवार का शुभ फल भी मिलता है. एकादशी के व्रत से पापों का नाश होता है. इस दिन स्नान, दान और ध्यान का अनंत गुना फल प्राप्त होता है.
पूजन विधि
कामिका एकादशी के दिन सवेरे-सवेरे भगवान कृष्ण की आराधना करें. पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. फल भी अर्पित कर सकते हैं. भगवान कृष्ण का ध्यान करें. उनके मंत्रों का जप करें. शिवजी को जल अर्पित करें. फिर शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं. पूर्ण रूप से जलीय आहार लें या फलाहार लें. अगर भोजन ग्रहण करना ही है तो सात्विक भोजन ही ग्रहण करें. मन को ईश्वर में लगाएं. क्रोध न करें.
पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 32 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 32 मिनट तक
पारण का समय- 01 अगस्त को सुबह 05 बजकर 41 मिनट से सुबह 08 बजकर 24 मिनट तक
कामिका एकादशी के नियम
कामिका एकादशी का व्रत दो प्रकार से रखा जाता है. निर्जल व्रत और फलाहारी या जलीय व्रत. निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए. सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए. बेहतर होगा कि इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाए.
व्रत न रख पाएं तो क्या करें? यदि आप कामिका एकादशी का व्रत नहीं रख रहे हैं तो कुछ खास नियमों का पालन जरूर करें. इस दिन अन्न और भारी भोजन खाने से परहेज करें. ज्यादा से ज्यादा समय ईश्वर की उपासना में लगाएं. सच्ची श्रद्धा और पूर्ण विश्वास के साथ भक्ति करने पर आपको भी समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिल सकता है.
ना करें ये काम
भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय है. एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ तुलसी जी की भी उपासना करना चाहिए. इससे श्रीहरि और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है लेकिन इस दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान भी रखना चाहिए. एकादशी के दिन तुलसी से जुड़ी कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए.
– तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का रूप माना गया है. सभी एकादशी के दिन तुलसी जी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इसलिए, एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं चढ़ाना चाहिए. वरना तुलसी जी का व्रत टूट जाता है और वे नाराज हो जाती हैं. इससे घर में गरीबी आती है, दुख-कष्ट बढ़ते हैं.
– एकादशी के दिन तुलसी को स्पर्श करना भी वर्जित है. लिहाजा एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़ें. पूजा में विष्णु जी को तुलसी दल अर्पित करने के लिए एक दिन पहले ही तुलसी की पत्तियां तोड़कर रख लें.
– एकादशी के दिन महिलाएं तुलसी जी की पूजा करते समय ध्यान रखें कि उनके बाल बंधे हुए हों. तुलसी जी की पूजा खुले बाल रखकर नहीं करना चाहिए.
– एकादशी के दिन और बल्कि किसी भी दिन तुलसी की पूजा करते समय काले रंग के कपड़े ना पहनें.
– एकादशी की शाम को तुलसी जी के पास घी का दीपक लगाएं. ध्यान रहे कि दीपक थोड़ा दूर रखें, ताकि तुलसी जी को स्पर्श ना हो.
– एकादशी की सुबह ही तुलसी के पौधे के आसपास अच्छे से सफाई कर लें. तुलसी के पौधे के पास कभी भी गंदगी ना रहने दें.
















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