‘भारत के संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ विषय पर राज्यसभा में दो दिन तक चली चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और कहा कि भारत का संविधान किसी की नकल नहीं है लेकिन यहां के नेता नकली, खाली और फर्जी संविधान लेकर लोगों को धोखा देते फिर रहे हैं. उन्होंने कटाक्ष किया कि नकली संविधान का भेद खुल गया इसीलिए जनता ने उन्हें चुनावों में हरा दिया.
शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर हमला बोला और कहा कि लोगों को पता चल गया है कि आप (कांग्रेस नेता) एक नकली, खाली संविधान लेकर चलते हैं, जिसकी वजह से आप हालिया चुनाव हार गए. शाह ने कहा कि संविधान का सम्मान सिर्फ बातों में नहीं, कामों में भी झलकना चाहिए. इस चुनाव में अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला किसी ने चुनावी सभाओं में संविधान को लहराकर, झूठ बोलकर जनादेश लेने की कुत्सित कोशिश की. उन्होंने कहा कि संविधान लहराने का विषय नहीं है, संविधान तो विश्वास का विषय है, श्रद्धा का विषय है.

शाह ने कहा, “महाराष्ट्र चुनाव में संविधान बांटे गए. एक पत्रकार के हाथ में वह आ गया. वह कोरा था। उसमें प्रस्तावना तक नहीं थी. 75 साल के इतिहास में संविधान के नाम पर इतना बड़ा छल हमने नहीं देखा है, न सुना है। हार का कारण ढूंढते हैं,तो मैं बता दूं कि लोग जान गए कि संविधान की प्रति फर्जी लेकर घूमते हो तो लोगों ने आपको हरा दिया.” उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में विभिन्न देशों के संविधानों की अच्छी बात लेने के साथ साथ इसमें अपने देश की परंपराओं का पूरा ध्यान रखा गया है.
शाह ने चुनाव में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर संदेह उठाये जाने पर भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब दो राज्यों के विधानसभा के चुनाव परिणाम एक ही दिन आये हों और एक में किसी पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया हो और दूसरे में वह जीत गयी हो तो ईवीएम पर सवाल उठाने वालों को शर्म करनी चाहिए “क्योंकि जनता देख रही है’’। शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिये बिना उनकी ओर संकेत करते कहा, ‘‘अभी कुछ राजनेता आये हैं, 54 साल की आयु में अपने को युवा कहते हैं. घूमते रहते हैं और (कहते हैं कि सत्तारूढ़ दल वाले) संविधान बदल देंगे, संविधान बदल देंगे. मैं उनसे कहना चाहता हूं कि संविधान बदलने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 368 में ही है.’’
उन्होंने कहा कि भाजपा ने 16 साल शासन किया जिसमें 22 बार संविधान में संशोधन किया गया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 55 साल शासन किया और इस दौरान उसने संविधान में 77 बार परिवर्तन (संविधान संशोधन) किए। गृह मंत्री ने दावा किया कि संविधान संशोधन में यह देखने वाली बात है कि किसने देश के नागरिकों की भलाई के लिए संशोधन किए और किसने अपनी सत्ता को बचाये रखने के लिए इसमें परिवर्तन किए.













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