भाई और बहन के प्यार भरे रिश्ते का प्रतीक भाई दूज का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है. दिवाली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाया जाता है. इसके अलावा, होली के बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भी भाई दूज मनाने की परंपरा है. इसे भ्राता द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर सौभाग्य का तिलक करती हैं. उसका स्वागत, सत्कार करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. इस बार इस खास मौके पर द्विपुष्कर, सर्वार्थ सिद्धि जैसे राजयोगों का निर्माण हो रहा है.
इस साल होली भाई दूज पर सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि के साथ द्विपुष्कर राजयोग का निर्माण हो रहा है. पंचांग के अनुसार, द्विपुष्कर राजयोग सुबह 11 बजकर 38 मिनट से शाम 4 बजकर 58 मिनट तक है.
तिलक लगाने का ये रहेगा मुहूर्त
इस बार होली भाई दूज की द्वितीया तिथि शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा तो ऐसे में आज सुबह से शाम 4 बजकर 58 मिनट तक तिलक किया जा सकता है.
कैसे करें भाई का तिलक?
भाई को तिलक करने से पहले पूजा की थाली तैयार करें. इसमें एक दीप जलाकर रख लें. शुद्ध केसर की कम से कम 27 पत्तियां रखें. उसमें शुद्ध लाल चंदन और गंगाजल मिलाएं. साफ चांदी की कटोरी या पीतल की कटोरी में यह तिलक तैयार करें. अपने भाई को तिलक करने से पहले यह कटोरी भगवान विष्णु के श्री चरणों में रखें. ॐ नमो नारायणाय मंत्र का 27 बार जाप करें. अब यह तिलक सबसे पहले भगवान गणपति और विष्णु जी को करें.
इसके बाद भाई को एक चौकी पर बैठाएं. यह तिलक अपने भाई को उत्तर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके तिलक करें. अब बहन अपने भाई को मिठाई खिलाएं और भाई भी अपनी बहन का मुंह मीठा कराएं. ऐसा करने से भाई-बहन का स्नेह हमेशा के लिए बना रहेगा. तिलक के बाद भाई की आरती उतारें और मन ही मन उसके भाग्योदय व लंबी उम्र की कामना करें.
कैसे मनाएं भाई दूज का त्योहार?
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, होली भाई दूज दिन भाई प्रातः काल चन्द्रमा का दर्शन करें. इसके बाद यमुना के जल से स्नान करें. अपनी बहन के घर जाएं और वहां बहन के हाथों से बना हुआ भोजन ग्रहण करें. बहनें भाई को भोजन कराएं. उनका तिलक करके आरती करें. फिर भाई सामर्थ्य के अनुसार अपनी बहन को उपहार दें.
















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