J&K के रामबन में बादल फटने से भारी तबाही, 3 की मौत; 100 से ज्यादा लोग बचाए गए

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जम्मू-कश्मीर स्थित रामबन के धर्मकुंड में रविवार सुबह अचानक बाढ़ आ गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. अचानक आई इस बाढ़ में 3 लोगों की मौत हो गई है, जबकि एक शख्स लापता हो गया है और कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं. साथ ही कई लोग अपने घरों में फंस गए हैं, उन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.  

बताया जा रहा है कि भारी बारिश के कारण नाले में पानी बढ़ गया और अचानक बाढ़ आ गई. ये पानी चेनाब पुल के पास धर्मकुंड गांव में घुस गया. गांव में पानी घुसने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया.

बाढ़ में बहे 100 घर: प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव में घुसे बाढ़ के पानी ने 100 घरों को पूरी तरह से तोड़ दिया है, जबकि 25 से 30 घरों में आंशिक रूप से नुकसान हुआ है.

जानकारी के अनुसार, इलाके में पानी घुसने से कई लोग अपने-अपने घरों में फंस गए हैं, उन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. रेस्क्यू टीम ने इलाके में अब तक 90 से 100 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है.

प्रशासन ने लोगों को दी सतर्क रहने की सलाह: इसी बीच रामबन जिले के डिप्टी कमिश्नर (उपायुक्त) ने खराब मौसम  को देखते हुए लोगों सतर्क रहने की सलाह दी है. डिप्टी कमिश्नर एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, रामबन जिले में खराब मौसम और भारी बारिश के मद्देनजर लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षा सलाहों का पालन करने की सलाह दी जाती है. किसी भी आपात स्थिति के लिए 24×7 जिला नियंत्रण कक्ष से 01998-295500, 01998-266790 संपर्क कर सकते हैं. सूचित रहें, सुरक्षित रहें!

बीजेपी नेता और सांसद जितेंद्र सिंह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में रामबन शहर के आसपास के इलाकों में रात भर भारी बारिश, भूस्खलन और तेज हवाएं चलीं. राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध है और दुर्भाग्य से 3 लोगों की हो गई है और कुछ परिवारों की संपत्ति का नुकसान हुआ है.

बीजेपी नेता ने कहा, ‘मैं उपायुक्त बसीर-उल-हक चौधरी के लगातार संपर्क में हूं. जिला प्रशासन वक्त पर और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशंसा का पात्र है, जिसने कई बहुमूल्य जीवन बचाने में मदद की. वित्तीय और अन्य सभी प्रकार की राहत प्रदान की जा रही है.’

लोगों से की अपील: उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि लोगों से अपील है कि वो घबराएं नहीं, हम सब मिलकर इस प्राकृतिक आपदा से जीतेंगे. डीसी को बताया गया है कि यदि जरूरत पड़ी तो सांसद के निजी संसाधनों से भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं.

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