घातक कालसर्प योग का बन रहा अशुभ संयोग, 28 जुलाई तक बेहद सावधान रहें ये 4 राशि वाले

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18 मई 2025 से राहु और केतु के राशि परिवर्तन के बाद यह दोष प्रभावी हो गया है. राहु कुंभ राशि में और केतु सिंह राशि में स्थित हैं, जिससे सभी ग्रह इनके प्रभाव क्षेत्र में आ गए हैं. यह योग 28 जुलाई 2025 तक सक्रिय रहेगा. जब मंगल सिंह से कन्या राशि में प्रवेश करेंगे, तब इसका प्रभाव कम होने लगेगा.

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वक्त कालसर्प दोष प्रभावी है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जब सभी ग्रह राहु और केतु की धुरी (एक्सिस) के एक ही ओर आ जाते हैं, तब कुंडली में कालसर्प योग बनता है. इसे एक अशुभ योग माना जाता है, हालांकि प्राचीन ग्रंथों में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता. पहले इसे नागदोष या पितृदोष के रूप में जाना जाता था, लेकिन आधुनिक ज्योतिष में इसे जीवन में मानसिक तनाव, बाधाएं और रुकावटें लाने वाला योग माना गया है.

इस काल में विशेष रूप से चार राशियां प्रभावित होंगी, जिन्हें मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में-

मेष राशि में इस समय साढ़ेसाती और केतु का पंचम भाव में गोचर एक साथ चल रहा है. परंपरा से हटकर कुछ नया करने की प्रेरणा मिलेगी, लेकिन विरोध झेलना पड़ सकता है. लव लाइफ में तनाव बढ़ेगा, जोखिम वाले कार्यों से बचना होगा. घर से दूर शिक्षा या कार्यवश जाना पड़ सकता है. पेट संबंधी समस्याएं और अस्पताल के चक्कर लग सकते हैं.

केतु सिंह राशि में और राहु की सीधी दृष्टि आप पर है. साथ ही मंगल का गोचर भी यहीं है, जिससे ऊर्जा असंतुलित हो सकती है. नौकरी और व्यापार में धैर्य और विवेक से निर्णय लें. आवेश में आकर फैसले न लें, विवादों से बचें. बिजली और धारदार वस्तुओं से सतर्क रहें, चोट की आशंका है.

साढ़ेसाती का अंतिम चरण और राहु का कुंभ राशि में गोचर चल रहा है. गुरु कुछ संतुलन बनाए रख रहे हैं, लेकिन कालसर्प दोष का प्रभाव मानसिक अस्थिरता ला सकता है. जल्दबाजी में गलत फैसले होने की आशंका. प्रेम संबंधों में मनमुटाव, स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं. अनावश्यक खर्च से बचें और खानपान में सावधानी बरतें.

साढ़ेसाती का दूसरा चरण और राहु-केतु का प्रभाव मीन राशि के जातकों पर आर्थिक व मानसिक चुनौतियां ला सकता है. द्वादश और षष्ठ भाव में राहु-केतु का गोचर अचानक नुकसान और स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है. गलत फैसलों से आर्थिक हानि हो सकती है, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर खर्च बढ़ेगा. कोई पुरानी बीमारी उभर सकती है, वाहन चलाते समय विशेष सावधानी जरूरी है.

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