इटावा में एक ब्राह्मण महिला टीचर को स्कूल प्रबंधक ने नौकरी से निकाल दिया. महिला टीचर उसी दांदरपुर गांव की रहने वाली है, जहां 21 जून को यादव कथावाचक की पिटाई हुई थी.
महिला का आरोप है कि यादव बिरादरी के कुछ युवकों ने उसकी चोटी काटने की धमकी दी. उसने यह बात जब स्कूल प्रबंधक को बताई तो उन्होंने नौकरी से बाहर कर दिया. 8वीं क्लास में पढ़ने वाली बेटी की पढ़ाई भी रुक गई है. वह भी उसी स्कूल में पढ़ती थी, जहां मां पढ़ाती थी. महिला टीचर घटना के बाद से डरी-सहमी है. वह पुलिस के पास जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रही है. उसके पति की मौत हो चुकी है. अपनी कमाई से ही वह अपना घर का खर्च चला रही थी.
2 साल पहले पति की मौत, घर में बेटी और सास: महेवा ब्लॉक के दांदरपुर गांव की रहने वाली रेनू दूबे गांव के ही डीएल इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाती थीं. दो साल पहले उनके पति विपिन कुमार दुबे की बीमारी से मौत हो गई थी. घर में एक 12 साल की बेटी तनिष्का और सास विमलेश कुमार (75) हैं.
रेनू दूबे ने बताया, हमारे गांव में 21 जून को कथा शुरू हुई थी. उसी दिन कथावाचकों को कुछ युवकों ने पीट दिया. 22 जून को घटना का वीडियो वायरल हुआ तो इलाके के लोगों में गुस्सा बढ़ गया.
23 जून को मैं स्कूल गई। मुझे खितौरा गांव भेजा गया. यहां मुझे माता-पिता को इस बात के लिए राजी करना था, वे अपने बच्चे का नाम हमारे स्कूल में लिखवाएं. रेनू कहती हैं कि वह घर-घर जाकर परिवार वालों से बच्चों के एडमिशन के लिए कन्वेंस कर रही थीं.
इसी दौरान गांव के कुछ युवकों ने उनका नाम और गांव पूछा. जैसे ही उन्होंने बताया, वह रेनू दूबे हैं और दांदरपुर से हैं. युवकों ने उनसे कहा, तुम्हारे गांव के ब्राह्मणों ने जो किया, वह गलत है. अगर हम तुम्हारी चोटी काट दें तो तुम्हें कैसा लगेगा. यह सुनकर रेनू तिवारी घबरा गईं और तुरंत घर लौट आईं. उसने पूरी बात परिवार को बताई. हालांकि इस मामले की शिकायत प्रशासन से उसने नहीं की है.
प्रबंधक ने स्कूल से निकाल दिया: इस घटना की जानकारी जैसे ही स्कूल के प्रबंधक रंजीत यादव तक पहुंची तो उन्होंने रेनू दूबे को फोन कर कहा, अब उन्हें स्कूल आने की कोई जरूरत नहीं है. बिना किसी पूछताछ और सफाई का मौका दिए, उन्हें नौकरी से हटा दिया गया. यह घटना 24 जून की है.

ये शिक्षिका का घर है. दो दिनों से शिक्षिका अपने घर से बाहर नहीं निकली.
बेटी की पढ़ाई भी रुकी, घर के बाहर तैनात हुई PAC: रेनू की बेटी भी उसी स्कूल में पढ़ती थी, लेकिन अब वह भी स्कूल नहीं जा पा रही है. पूरे घटनाक्रम के बाद रेनू के घर के बाहर पीएसी के जवान तैनात कर दिए गए हैं. जब मीडिया टीम टीम रेनू के घर पहुंची, तो वह काफी देर तक चुप रहीं. काफी समझाने और पूछने पर वह रो पड़ीं और बोलीं- मैं सिर्फ एक शिक्षिका हूं, किसी विवाद से मेरा कोई लेना-देना नहीं है. मुझे नौकरी से निकाल दिया गया, अब मेरी बेटी की पढ़ाई भी बंद हो गई है और घर चलाने का कोई साधन नहीं बचा है.
रेनू की अपील- इंसाफ चाहिए, फिर से काम करना चाहती हूं: रेनू ने किसी के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया. उन्होंने बस इतना कहा कि उन्हें सरकार और प्रशासन से इंसाफ चाहिए. वह फिर से काम करना चाहती हैं, ताकि अपने परिवार का पेट पाल सकें और बेटी को पढ़ा सकें.
स्कूल प्रबंधक बोले- निकाला नहीं, दो-तीन दिन नहीं आने के लिए कहा: स्कूल के प्रबंधक रंजीत यादव ने बताया, रेनू दुबे और अन्य शिक्षकों के साथ कन्वेंसिंग के लिए जाती थीं, लेकिन लगातार मीडिया वालों के फोन उन पर आ रहे थे तो उन्हें काम करने में दिक्कत हो रही थी. इसलिए प्रिंसिपल नीलम मिश्रा ने उनसे कहा कि मैडम आपके गांव में पुलिस लगी है. बार-बार स्कूल की वैन भेजने में दिक्कत हो रही है. इसलिए दो-तीन दिन आप ना आएं. रंजीत यादव ने बताया, हमारे यहां प्रिंसिपल से लेकर कई स्टाफ ब्राह्मण समाज से ही हैं, ऐसी कोई बात नहीं है, ना ही उनसे उनको निकाला गया है, सिर्फ उनको दो-तीन दिन ना आने के लिए कहा गया है.
















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