हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर माता दुर्गा को समर्पित मासिक दुर्गाष्टमी पर्व मनाया जाता है. इस तिथि पर मां दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना करने का विधान है. आषाढ़ मास की दुर्गाष्टमी व्रत पर जो भी भक्त देवी दुर्गा की विशेष पूजा आराधना करते हैं उनके जीवन के दुखों का अंत हो जाता है. मां दुर्गा के भक्त इस दिन व्रत का संकल्प भी करते हैं. मां हमेशा अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखती है. आइए जानें कि आषाढ़ माह की मासिक दुर्गाष्टमी व्रत में मां दुर्गा की पूजा विधि क्या है.
पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी तिथि 2 जुलाई 2025 की रात को 10 बजे से शुरू हो रही है और 3 जुलाई 2025 की रात में 11:30 बजे तिथि का समापन होगा. उदया तिथि में आषाढ़ दुर्गाष्टमी व्रत 3 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा.
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन कैसे करें मां दुर्गा को प्रसन्न?
-दुर्गाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठ जाएं. स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें.
-मन ही मन पूजा और व्रत का संकल्प करें और घर के पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर शुद्ध कर लें.
-एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें.
-मां दुर्गा को लाल चुनरी से लेकर सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां आदि से श्रृंगार कर सजाएं.
-एक दीपक जलाएं और फिर मां दुर्गा को लाल गुड़हल के फूल अर्पित करें.
-माता को मौसमी फल, मिठाई और हलवा-पूरी भोग के रूप में अर्पित करें.
-अब माता के सामने बैठ जाएं और दुर्गा चालीसा का पाठ करें.
-दुर्गा मां के मंत्रों का जाप करें. मंत्र है- “ॐ दुं दुर्गायै नमः” या “या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”
-अंत में मां दुर्गा की आरती कर परिवार समेत आरती कर पूजा संपन्न करें.
-पूजा में भूल चूक के लिए मां से क्षमा मांगे.
















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