प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम चीन के तियानजिन पहुंचे. जहां एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत हुआ. पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए तियानजिन पहुंचे हैं. इस समिट से इतर अन्य आकर्षणों की बात करें तो एससीओ समिट के कार्यक्रम से इतर पीएम मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात होगी.
कैसे बिठा सकते हैं तालमेल: पूर्व चीनी राजनयिक हीन ने कहा कि यह दोनों देशों के लिए यह देखने का अच्छा अवसर है कि वे एक-दूसरे के साथ कैसे तालमेल बिठा सकते हैं और दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए एक रूपरेखा कैसे विकसित कर सकते हैं. इंडियन फार्मा कंपनी में कार्यरत अमित ने भी इस पहल की सराहना की,उन्होंने कहा, “एससीओ जैसे मंच एशियाई देशों को एकजुट करने का अच्छा प्रयास हैं.
रूस, भारत और चीन जैसे देशों के बीच सहयोग से वैश्विक व्यापार तनाव के बीच संतुलन बन सकता है. इस यात्रा से भारत-चीन व्यापार संबंधों को और मजबूती मिलेगी.चीन के कारोबारी वेलिन ने कहा कि भारत और चीन एशिया के दो बड़े आर्थिक दिग्गज हैं. मैं राजनीति से जुड़ा नहीं हूं, लेकिन एक व्यापारी के रूप में हर कोई भारत के साथ सहयोग को लेकर उत्साहित है. प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी द्विपक्षीय और वैश्विक सहयोग को दोबारा गति देने की शुरुआत है.
पीएम के दौरे पर क्या बोले पूर्व चीनी राजनायिक: पूर्व चीनी राजनयिक हीन ने आईएएनएस से कहा, “हम एक स्थानीय चीनी नागरिक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे. लगभग सात वर्षों के बाद उनका यह दौरा चीन और भारत के संबंधों को एक नई दिशा दे सकता है, आज के जटिल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में यह यात्रा एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आशा की किरण है.
उन्होंने आगे कहा, “भारत और चीन हजारों सालों से पड़ोसी रहे हैं और एक-दूसरे की कई बार मदद की है, खासकर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान. भारत ने चीन को कई मूल्यवान सबक भी दिए हैं. चीनी लोगों ने भारत से, खासकर बौद्ध धर्म के माध्यम से, सीखा है. भारत ने संगीत, नृत्य, संस्कृति, मूर्तिकला और साहित्य के क्षेत्र में चीन को प्रभावित किया है. बीजिंग में एक भारतीय रेस्तरां के मालिक अजीत खान ने इस यात्रा को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया.
उन्होंने कहा, “भारत और चीन दोनों ही प्राचीन सभ्यताएं हैं और पड़ोसी भी, भारत के एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) का हिस्सा बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का इस शिखर सम्मेलन में शामिल होना एक सशक्त संदेश है कि दोनों देश मिलकर भविष्य की ओर बढ़ना चाहते हैं.













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