नेपाल की संसद में घुसे हजारों Gen-Z: गेट नंबर 2 पर लगाई आग, फायरिंग में 2 मरे

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नेपाल में करप्शन और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हजारों Gen-Z की भीड़ संसद भवन में घुस गए हैं. पुलिस भी प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती से पेश आ रही है. बताया जा रहा है कि पुलिस ने कुछ लोगों पर वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का भी इस्तेमाल किया है. खबर यह भी है कि कुछ युवाओं की पुलिस के साथ हाथापाई भी हुई है. हालात को काबू में देखते हुए काठमांडू जिला प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है.

बताया जा रहा है कि ये लोग देश की संसद में घुस गए और कहा जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने संसद के गेट नंबर 2 पर आग भी लगा दी है. इसके अलावा यह भी खबर है कि गोली चलने की वजह से एक व्यक्ति की जान चली गई है. अस्पताल के मुताबिक घायल प्रदर्शनकारी की न्यू बनेश्वर के सिविल अस्पताल में ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. अस्पताल के मुताबिक 70 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है.

काठमांडू के अलावा बिराटनगर, बुटवल, चितवन और पोखरा समेत कई शहरों में युवाओं ने भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. स्थिति बिगड़ने पर जिला प्रशासन ने दोपहर 12:30 से रात 10 बजे तक कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया. इसके बाद हालात संभालने के लिए नेपाली सेना को भी बानेश्वर इलाके में उतारा गया. ये सभी नौजवान सरकार से सोशल मीडिया पर पाबंदी हटाने की मांग कर रहे हैं.

एक नोटिस जारी करते हुए प्रशासन ने काठमांडू ने सोमवार को दोपहर 12:30 बजे से रात 10 बजे तक कर्फ्यू की घोषणा की. काठमांडू के मुख्य जिला अधिकारी छबीलाल रिजाल की तरफ से जारी एक नोटिस के मुताबिक बनेश्वर चौक से बिजुलीबाजार पुल, बनेश्वर चौक से टिंकुने चौक, बनेश्वर चौक से रत्ना राज्य स्कूल और बनेश्वर चौक से शंखमुल पुल क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया है.

नेपाल के पीएम और राष्ट्रपति की सुरक्षा बढ़ाई: कहा जा रहा है कि नौजवानों की तादाद इतनी ज्यादा है कि प्रशासन के हाथ पैर फूल गए हैं. साथ ही प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के घर की सुरक्षा में भी इजाफा कर दिया गया है. क्योंकि भीड़ काफी गुस्से में है और बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ रही है.

नेपाल सरकार ने फेसबुक, एक्स (पहले ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसी बड़ी सोशल मीडिया साइट्स को ब्लॉक करने का ऐलान किया था. सरकार ने दलील दी थी कि यह कंपनियां सरकार के नए नियमों का पालन नहीं कर रही हैं. यह फैसला संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरंग की अगुवाई में हुई बैठक में लिया गया. इस बैठक में मंत्रालय के अधिकारी नेपाल टेलिकम्युनिकेशन अथॉरिटी, टेलीकॉम कंपनियां और इंटरनेट सेवा प्रदाता भी शामिल थे.

नेपाल ने सोशल मीडिया क्यों बैन किया? यह रोक सरकार के उस फैसले के बाद आई है जिसमें बिना रजिस्ट्रेशन वाले सभी प्लेटफॉर्म्स को तुरंत ब्लॉक करने का आदेश दिया गया. सरकार ने इन कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सात दिन का समय दिया था, जो बुधवार आधी रात को खत्म हो गया.

नेपाल ने 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर लगाई पाबंदी: नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप समेत 26 बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाबंदी लगा दी है. सरकार का आरोप है कि ये कंपनियां नए नियमों का पालन नहीं कर रही थीं. यह बैन गुरुवार (4 सितंबर) आधी रात से लागू हो गया. हालांकि सरकार के जरिए लिए गए फैसले के बाद से ही इसका विरोध हो रहा है लेकिन अब जनता सड़क पर उतर आई है.

लोगों की आवाज दबाना चाहती है नेपाल सरकार? मानवाधिकार और प्रेस की आज से जुड़ी संस्थाओं ने भी नेपाल सरकार के इस फैसले की आलोचना की. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार लोगों की बोलने की आजादी छीन रही है और कारोबार को भी नुकसान पहुंचा रही है.

कौन होते हैं GEN-Z? Gen-Z या फिर जेरनेशन ज़ी वे युवा हैं जिनका जन्म लगभग 1997 से 2012 के बीच हुआ है. यह पीढ़ी पूरी तरह डिजिटल दौर में पली-बढ़ी है और स्मार्टफोन, इंटरनेट व सोशल मीडिया इनके जीवन का अहम हिस्सा है. जेन ज़ी तेजी से बदलती तकनीक, ट्रेंड्स और ग्लोबल कल्चर से गहराई से जुड़ी है. यही कारण है कि नेपाल में सरकार की तरफ से लगाई गई पाबंदी GenZ के ज्यादा अखर रही है.

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