आज कार्तिक महीने की आंवला नवमी है, जिसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है. अक्षय नवमी का उल्लेख पद्म पुराण में मिलता है. इसके अनुसार भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को बताया गया है कि आंवले के वृक्ष में जगत के पालनहार श्री हरि का वास है. वहीं, इस दिन विधि-विधान से पूजन करने से गोदान के समान पुण्य प्राप्त होता है. आइये जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त, विधिऔर आंवला नवमी कथा के बारे में-
पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि 30 अक्टूबर 2025, सुबह 10:06 बजे से शुरू होगी. यह 31 अक्टूबर 2025, सुबह 10:03 बजे समाप्त होगी. शास्त्रों में उदया तिथि मान्य होती है, इसलिए इस साल आंवला नवमी 31 अक्टूबर की सुबह 06:32 बजे से 10:03 बजे तक है.
मां लक्ष्मी ने की थी आंवले के पेड़ की पूजा: आंवला नवमी की पौराणिक कथा के अनुसार, ”एक बार मां लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करने आईं और रास्ते में उनके मन में भगवान विष्णु और शिव की एक साथ पूजा करने की इच्छा प्रकट हुई. फिर माता सोचने लगीं कि इन दोनों देवताओं को एक साथ कैसे पूजा जा सकता है. तब उन्होंने महसूस किया कि तुलसी और बेल की गुणवत्ता एक साथ आंवले के पेड़ में ही पाई जाती है.

तब माता लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ को विष्णु और शिव का प्रतीक मानकर उसकी विधि विधान पूजा की. इस पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और शिव प्रकट हुए. जिसके बाद लक्ष्मी माता ने आंवले के पेड़ के नीचे भोजन तैयार किया और उसे श्री विष्णु और भगवान शिव को परोसा. इसके बाद इस भोजन को स्वयं प्रसाद रूप मे ग्रहण किया. कहते हैं जिस दिन ये घटना हुई थी उस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी की तिथि थी. कहते हैं तब से ही इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा शुरू हो गई.”
पूजा का शुभ मुहूर्त: 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को पूजा मुहूर्त सुबह 06:37 बजे से 10:04 बजे तक रहेगा. कुल समय लगभग 3 घंटे 25 मिनट तक रहने वाला है. इस दौरान आंवले के पेड़ की पूजा, दीपदान, भजन-कीर्तन और दान का विशेष महत्व है.
कैसे करें अक्षय नवमी की पूजा? सबसे पहले आंवले के पेड़ के पास जाकर उसकी जड़ में शुद्ध जल और दूध अर्पित करें. इसके बाद पेड़ की शाखाओं और तनों पर रोली, चंदन, अक्षत (भक्तिपूर्ण चावल), धूप, दीप, पुष्प और फल अर्पित करें. विशेष रूप से आंवले के फल को पूजा में शामिल करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन पेड़ की सात बार परिक्रमा करना अत्यंत फलदायी होता है. परिक्रमा करते समय मन में भगवान विष्णु की भक्ति और अपने परिवार की समृद्धि की कामना करें. पूजा के अंत में प्रार्थना करते हुए आंवले के फल को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें. ऐसा करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य, लंबी उम्र और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर करें भोजन: आंवला नवमी के दिन पूजा के बाद आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर ही भोजन करना चाहिए. ऐसा करने से पूरे परिवार पर भगवान शिव, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा होती है. परिवार में सुख-समृद्धि रहती है.
















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