पुनीत शुक्ला, कानपुर।
पूर्व कोयला मंत्री और कांग्रेस से कानपुर के सांसद रहे श्रीप्रकाश जायसवाल के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों का हुजूम उमड़ा. दो दिन बाद कनाडा में रह रहे बेटे के पहुंचने के बाद अंतिम यात्रा रविवार को निकाली गई. अंतिम यात्रा लाल बंगला पोखरपुर से निकली.
सबसे पहले अंतिम यात्रा कैनाल रोड पर उनके पैतृक आवास पर पहुंची. इस दौरान समर्थक ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, श्रीप्रकाश तुम्हारा नाम रहेगा’, ‘श्रीप्रकाश अमर रहे’ के नारे लगाए. इसके बाद यात्रा कांग्रेस कार्यालय तिलक भवन पहुंची. जहां कांग्रेसियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. यहां से अंतिम यात्रा भैरवघाट पहुंची. यहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.

बेटों ने उन्हें मुखाग्नि दी: इससे पहले बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, कानपुर सांसद रमेश अवस्थी, अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले, भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अंटू मिश्रा समेत तमाम लोगों ने श्रीप्रकाश जायसवाल को श्रद्धांजलि दी. बता दें कि शुक्रवार यानी 28 नंवबर की शाम श्रीप्रकाश जायसवाल कार्डिक अरेस्ट से निधन हो गया था. वे 81 साल के थे। जायसवाल लंबे समय से बीमार चल रहे थे.
इससे पूर्व उनका पार्थिव शरीर आज सुबह लालबंगला स्थित आवास से अंतिम यात्रा के लिए निकला. उनके बड़े बेटे सिद्धार्थ जायसवाल भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सुबह कनाडा से कानपुर पहुंचे. अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए सुबह से ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अन्य दलों के नेता और कार्यकर्ता भी उनके आवास पर पहुंचे.
अंतिम यात्रा में दिग्गजों की उपस्थिति: इनमें प्रमुख रूप से बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, कानपुर सांसद रमेश अवस्थी, अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले, भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा आदि शामिल रहे। बता दें कि, श्रीप्रकाश जायसवाल का शुक्रवार को 81 साल की उम्र में निधन हो गया था.
इस रूट गुजरी अंतिम यात्रा: यात्रा सबसे पहले कैनाल रोड स्थित पैतृक निवास पहुंचेगी। उसके बाद यात्रा मेस्टन रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय तिलक हाल में कुछ देर रुकेगी। यहां देशभर से आए नेता और लोग पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद यात्रा भैरव घाट के लिए प्रस्थान करेगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
शोक का माहौल: कांग्रेस कार्यकर्ताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और आम नागरिकों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को विदाई दी. उनकी सौम्यता और हर वर्ग से जुड़े रहने के कारण उन्हें भारी जनसमर्थन मिला.
















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