क्या होता है कल्पवास, कब से होगा शुरू? जानें तिथि, मुहूर्त और इस दौरान क्या करें और क्या नहीं

Spread the love

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ का महीना अध्यात्म और आत्मशुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. शास्त्रों और पुराणों में इस मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी बताया गया है. मान्यता है कि माघ के दौरान किए गए जप, तप और दान का फल कभी समाप्त नहीं होता (अक्षय रहता है). इसी महीने में कल्पवास की परंपरा का विशेष महत्व है. धार्मिक परंपरा के अनुसार, कल्पवास प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर रहकर पूर्ण किया जाता है. इससे जुड़ी परंपरा बेहद खास और पुण्यदायी मानी गई है. दृक पंचांग के अनुसार, माघ का महीना 4 जनवरी 2026 से शुरू होने वाला है. ऐसे में आइए जानते हैं कि माघ महीने में कल्पवास कब से कब तक चलेगा, स्नान की प्रमुख तिथियां कौन-कौन सी हैं और इससे जुड़े विशेष नियम क्या हैं.

क्या है कल्पवास? ‘कल्प’ का अर्थ होता है एक निश्चित समय-अवधि या युग, और वास का अर्थ है- निवास करना. आध्यात्मिक दृष्टि से कल्पवास का अर्थ है एक निश्चित समय के लिए सांसारिक मोह-माया को त्यागकर ईश्वर के सानिध्य में रहना. शास्त्रों में इसे गृहस्थ जीवन से सन्यास की ओर बढ़ने का एक प्रशिक्षण माना गया है. आमतौर पर यह साधना पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक चलती है. हालांकि, अपनी क्षमता और समय के अनुसार श्रद्धालु 5, 11 या 21 दिनों का संकल्प भी ले सकते हैं.

कल्पवास के नियम: शास्त्रों के अनुसार कल्पवास सिर्फ गंगा तट पर रहना नहीं है, बल्कि यह स्वयं को अनुशासित करने की एक कठिन तपस्या है. कल्पवासी को महल या सुख-सुविधाओं वाले घर के बजाय नदी तट पर फूस की कुटिया बनाकर रहना होता है. इस दौरान परिवार और गृहस्थी के विचारों से पूरी तरह अलग रहना जरूरी माना गया है. कल्पवास के दौरान दिन में सिर्फ एक बार भोजन करने का विधान है. भोजन स्वयं के हाथों से बना हुआ सात्विक होना चाहिए. कल्पवास करने वालों को प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त सहित दिन में तीन बार पवित्र गंगा जल में स्नान करना होता है और विधिवत पूजन करना होता है.

कल्पवाल करने वाले भोग-विलास का त्याग कर जमीन पर ही बिस्तर बिछाकर सोते हैं. इस पूरी अवधि में मन, वचन और कर्म से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है. इसके साथ ही, इस अवधि में किसी भी प्रकार के नशे का सेवन वर्जित है. साथ ही क्रोध, झूठ और अपशब्दों का त्याग कर वाणी पर नियंत्रण रखना जरूरी होता है. इसके अलावा अपनी कुटिया में तुलसी का पौधा लगाकर उसका नियमित पूजन करना चाहिए. पूरा समय भजन, संतों के सत्संग और धार्मिक ग्रंथों के पाठ में गुजारना चाहिए. इतना ही नहीं, कल्पवास की समाप्ति पर भगवान सत्यनारायण का पूजन और कथा कराना शुभ माना जाता है. अंत में ब्राह्मणों और निर्धनों को सामर्थ्य अनुसार दान देकर ही यह साधना पूर्ण मानी जाती है.

माघ स्नान के शुभ मुहूर्त

➤पहला स्नान- पौष पूर्णिमा (3 जनवरी 2026)
➤दूसरा स्नान- मकर संक्रांति का स्नान 15 जनवरी को होगा.
➤तीसरा स्नान- मौनी अमावस्या स्नान (18 जनवरी 2026)
➤चौथा स्नान- माघ पूर्णिमा (23 जनवरी 2026)

कब से कब तक चलेगा कल्पवास? शास्त्रों के अनुसार, कल्पवास पौष पूर्णिमा से शुरू होकर माघ महीने की पूर्णिमा तक चलता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष मास की पूर्णिमा 3 जनवरी 2026 को पड़ेगी. ऐसे में इस दिन से कल्पवास शुरू हो जाएगा. जबकि, कल्पवास का समापन 1 फरवरी 2026 को होगा, क्योंकि इस दिन माघ मास की पूर्णिमा तिथि है. परंपरा के अनुसार माघ महीने का कल्पवास इसी दिन पूरा होता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *