सनातन धर्म में शुभ-अशुभ समय का बड़ा ख्याल रखा जाता है. इसलिए हर अच्छे काम के लिए लोग चौघडि़या देखते हैं. वहीं पंचक, भद्रा काल, राहु काल, खरमास जैसे समय को शुभ कामों के लिए अशुभ माना गया है. इस समय दिसंबर का आखिर चल रहा है. लोग क्रिसमस की छुट्टियां मनाने और नए साल का स्वागत करने की तैयारी में है. इस दौरान लोग ट्रिप पर भी जाते हैं. लेकिन इस बार दिसंबर के आखिर में पंचक के 5 अशुभ दिन पड़ रहे हैं. पंचक काल में शुभ-मांगलिक कार्य करना तो वर्जित होता ही है, साथ ही यात्रा करना भी निषिद्ध होता है. ऐसे में यदि यात्रा करना ही पड़े तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए.
दिसंबर में पंचक कब से कब तक? पंचांग के अनुसार दिसंबर महीने में पंचक की शुरुआत 24 दिसंबर की शाम 7 बजकर 47 मिनट से होगी और 29 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 41 मिनट पंचक समाप्त होंगे. हालांकि ये पंचक 24 दिसंबर, बुधवार से शुरू हो रहे हैं, जो राज पंचक होते हैं और ये बाकी पंचक की तरह उतने अशुभ नहीं होते हैं.
जब-जब चन्द्र ग्रह धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण करते हैं तो उस समयावधि को पंचक काल कहा जाता है. इसके अलावा जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हैं, तब भी पंचक होता है.
पंचक में नहीं करने चाहिए ये काम: वैसे तो पंचक काल में चारपाई बनवाना, घर का निर्माण शुरू करना, घर की छत डलवाना, गृहप्रवेश करना, लकड़ी का सामान खरीदना, ज्वलनशील चीजें खरीदना अशुभ होता है. ऐसा करने से जीवन में नकारात्मकता, कष्ट और संकट आते हैं. इसके अलावा पंचक काल में यात्रा करना भी अशुभ माना गया है. विशेष तौर पर पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह दिशा यम और पितरों की होती है. यदि यात्रा की जाए तो भारी कष्ट उठाने पड़ते हैं.
पंचक में यात्रा करना पड़े तो क्या करें?
यदि पंचक काल में यात्रा करना जरूरी हो तो यात्रा पर निकलने से पहले कुछ उपाय जरूर कर लेना चाहिए. ऐसा करने से यात्रा में परेशानी नहीं आती है. इसके लिए पंचक में यात्रा पर निकलने से पहले हनुमान जी की पूजा करें, उन्हें फल चढ़ाएं और मंत्र जाप करें. हनुमान चालीसा पढ़ें और यात्रा के दौरान रक्षा करने की प्रार्थना करें. अपने इष्ट का स्मरण करने यात्रा पर निकलें.
















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