नये साल 2026 की 7 सबसे शुभ तिथियां, बिना मुहूर्त निकाले ही कर सकेंगे मांगलिक कार्य

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सनातन परंपरा में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को करने के लिए पंचांग में सर्वोत्तम तिथि और मुहूर्त देखा जाता है. जैसे कि शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या किसी नए काम की शुरुआत उपयुक्त तिथि और मुहूर्त देखकर ही की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदू कैलेंडर में कुछ तिथियां अपने आप में एक शुभ मुहूर्त होती हैं, जिन पर पंचांग देखे बिना भी आप कोई शुभ कार्य कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि वो तिथियां कौन सी हैं और नए साल 2026 में कब-कब आएंगी.

बसंत पंचमी बसंत: पंचमी का त्योहार हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. नए साल में बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा. इस दिन ज्ञान, कला और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा का विधान है. छोटे बच्चों की पढ़ाई लिखाई शुरू कराने के लिए इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है. विवाह के लिए भी इस दिन को बहुत उत्तम माना गया है.

फुलेरा दूज: होली से ठीक पहले फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाता है. यह तिथि भी साल के सबसे सर्वोत्तम मुहूर्तों में शुमार है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा का विधान है. शादी-विवाह से लेकर गृह प्रवेश, मुंडन या किसी नए काम की शुरुआत इस दिन करना श्रेष्ठ माना जाता है. नए साल में फुलेरा दूज 19 फरवरी को मनाया जाएगा.

अक्षय तृतीया: वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा को अत्यंत लाभकारी माना गया है. कहते हैं कि इस दिन दान-स्नान, नए कार्यों की शुरुआत या नई चीजों की खरीदारी करने से बड़ा लाभ होता है. नए साल में अक्षय तृतीया का त्योहार 19 अप्रैल को मनाया जाएगा.

जानकी नवमी: वैशाख शुक्ल की नवमी तिथि को नवमी जयंता मनाने की परंपरा है. यह शुभ दिन माता सीता के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान राम और माता की पूजा का विधान है. यह तिथि धन, वैभव की प्राप्ति और पति की लंबी आयु के लिए भी उत्तम मानी जाती है. कहते हैं कि इस दिन शुरू किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलने की संभावनाएं बहुत अधिक होती हैं. नए साल 2026 में जानकी नवमी 25 अप्रैल को मनाई जाएगी.

गंगा दशहरा: ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाए जाने वाला गंगा दशहरा मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है. इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करने से हमारे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. यदि किसी के लिए गंगा घाट पर जाना संभव न हो तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लेना चाहिए. किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए इस तिथि को एक अबूझ मुहूर्त माना जाता है. नए साल 2026 में गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जाएगा. Advertisement

भड़ली नवमी: आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि को भड़ली नवमी कहते हैं जो अपने आप में एक दिव्य मुहूर्त है. ज्योतिषविद कहते हैं कि इस तिथि पर पंचांग देखे बिना भी लगन, विवाह, गृह प्रवेश या किसी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है. नए साल 2026 में भड़ली नवमी 22 जुलाई को मनाई जाएगी.

देवउठनी एकादशी: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और फिर शुभ-मांगलिक कार्यों पर लगी पाबंदी हटती है. इसी दिन से शहनाइयां गूंजनी शुरू होती हैं. नए साल 2026 में देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को मनाई जाएगी.

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