सकट चौथ आज, जानें भगवान गणेश का पूजन मुहूर्त, महत्व और चंद्रोदय का समय

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Sakat Chauth 2026: आज सकट चौथ का व्रत रखा जा रहा है. सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. सकट चौथ एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है, जिसमें भगवान गणेश की पूजा की जाती है. इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. यह पर्व भारत के लगभग हर हिस्से में मनाया जाता है. व्रत के दौरान महिलाएं सकट की कथा सुनती हैं और शाम के समय विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करती हैं. इस दिन रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं जल ग्रहण करके व्रत का पारण करती हैं. इस दिन भगवान गणेश को शकरकंद, मौसमी फल और तिल-गुड़ के लड्डू का भोग लगाया जाता है. आइए जानते हैं कि सकट चौथ की क्या तिथि रहने वाली है और क्या पूजन मुहूर्त रहने वाला है.

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 26 मिनट से सुबह 6 बजकर 21 मिनट
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 11 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 53 मिनट तक
गोधूली मुहूर्त- शाम 5 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 04 मिनट तक
अमृत काल- सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 7 बजकर 15 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक

सकट चौथ पर आज चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 54 मिनट रहेगा.

पूजन सामग्री: सकट चौथ पर पूजा के लिए भगवान गणेश की मूर्ति, लाल फूल, दूर्वा घास की 21 गांठें, लकड़ी की चौकी (जिस पर गणेश जी की स्थापना होगी), जनेऊ, सुपारी, पान का पत्ता, चौकी पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा, गाय का घी, दीपक, अगरबत्ती, गंगाजल, मेहंदी, सिंदूर, लौंग, रोली, अबीर, गुलाल, इलायची, अक्षत, हल्दी, मौली, 11 या 21 तिल के लड्डू, मोदक, फल, कलश, चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए दूध, चीनी, इत्र और सकट चौथ की कथा की किताब शामिल हैं.

पूजन विधि: सकट चौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. संभव हो तो इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनें. स्नान के बाद पूजा की शुरुआत करें और हाथ में अक्षत व फूल लेकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद ये अक्षत और फूल भगवान गणेश को अर्पित करें. पूजा स्थान पर गुड़ और तिल के लड्डू, शकरकंद, धूप, चंदन, तांबे के लोटे में जल और मौसमी फल रखें. साथ ही पूजा स्थल पर देवी दुर्गा की मूर्ति अवश्य रखें. इस व्रत की मुख्य पूजा शाम को होती है, इसलिए शाम की पूजा से पहले दोबारा स्नान करें.

इसके बाद भगवान की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं. देवी-देवताओं को तिलक लगाएं और जल अर्पित करें. भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें और सकट चौथ की कथा सुनें. कथा के बाद भगवान गणेश की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं. रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें और भोग अर्पित करें. चंद्रमा की पूजा के बाद ही व्रत खोलें.

सकट चौथ पर चंद्रमा की पूजा विधि: चंद्रमा निकलने के बाद सबसे पहले उसे जल अर्पित करें. जल में थोड़ा गंगाजल, कच्चा दूध, सफेद तिल, साबुत अनाज और फूल जरूर डालें. इसके बाद चंद्रमा को धूप और दीप दिखाएं. फिर भोग अर्पित करें और चंद्रमा की तीन परिक्रमा करें.

क्यों की जाती है चंद्रमा की पूजा? शास्त्रों के अनुसार चंद्रमा को औषधियों का स्वामी और मन का कारक माना गया है. चंद्रदेव की पूजा के दौरान महिलाएं संतान के दीर्घायु और निरोग होने की कामना करती हैं. ऐसा कहा जाता है कि सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने से सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. चांदी के बर्तन में पानी के साथ थोड़ा सा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए. संध्याकाल में चंद्रमा को अर्घ्य देना काफी लाभदायक होता है. चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार और दुर्भावना से निजात मिलती है और साथ ही सेहत को लाभ मिलता है. इसलिए सकट चौथ पर गणेश जी की पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पूजा की जाती है.

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