मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी पड़ने से ‘खिचड़ी संकट’, ज्‍योतिषाचार्यों ने निकाला यह तोड़

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Makar Sankranti on Ekadashi 2026 : 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा. इसी दिन माघ महीने के कृष्‍ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे ष‍टतिला एकादशी कहते हैं. षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्‍णु को तिल का भोग लगाया जाता है, तिल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है, तिल का दान किया जाता है. वहीं मकर संक्रांति के दिन भी तिल-गुड़ खाने और दान करने का विधान है. लेकिन इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाई जाती है. इस दिन चावल, उड़द की दाल, घी और सब्जियों से बनी खिचड़ी खाने से सूर्य देव और शनि देव की कृपा प्राप्‍त होती है. इसलिए मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहते हैं. लेकिन इस साल इसी खिचड़ी खाने पर संकट पैदा हो गया है.

एकादशी के दिन कैसे खाएं खिचड़ी? एकादशी तिथि के दिन चावल खाना निषिद्ध है. जो लोग एकादशी व्रत नहीं करते हैं, वे भी इस दिन चावल का सेवन नहीं करते हैं. लेकिन इस साल मकर संक्रांति के दिन ही षटतिला एकादशी है. ऐसे में लोग असमंजस में हैं कि अब मकर संक्रांति के दिन चावल और उड़द दाल की खिचड़ी कैसे खाएं और कैसे इस त्‍योहार की ये महत्‍वपूर्ण परंपरा निभाएं.

इसे लेकर 2 तरह के विकल्‍प ज्‍योतिषाचार्य और धर्म-शास्‍त्रों की जानकारों द्वारा दिए जा रहे हैं. पहला तर्क तो यह है कि बड़े पर्व-त्‍योहार के दिन यदि ऐसी कोई अड़चन आए तो मानना अनिवार्य नहीं होता है. यानी कि साल में एक बार आने वाले मकर संक्रांति पर्व को पूरे विधि-विधान से मनाने के लिए खिचड़ी यानी कि चावल का सेवन किया जा सकता है.

वहीं जो लोग एकादशी के दिन चावल ना खाने का नियम पालते हैं, उनके लिए एक विकल्‍प यह भी है कि वे 14 जनवरी की शाम 05.52 बजे के बाद खिचड़ी का दान करें और खिचड़ी का सेवन करें. क्‍योंकि एकादशी तिथि 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से 14 जनवरी की शाम 05 बजकर 52 मिनट तक है. ऐसे में शाम को एकादशी तिथि समाप्‍त होने के बाद वे चावल का सेवन कर सकते हैं.

23 साल पहले भी बना था ऐसा संयोग: जानकारों के मुताबिक साल 2003 में भी ऐसा संयोग बना था, जब मकर संक्रांति के दिन ही एकादशी तिथि पड़ी थी. उसके बाद साल 2026 में मकर संक्रांति के दिन एकादशी तिथि आई है. यह दुर्लभ संयोग होने के कारण मकर संक्रांति के दिन किए गए दान-पुण्‍य का कई गुना ज्‍यादा फल प्राप्‍त होगा.

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