आज भाद्रपद माह की सोमवती अमावस्या है. अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, पिंड दान और पितर पूजा की जाती है. इस दिन गौ दान और स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. अमावस्या का दिन पूर्वजों और पितरों को याद करने के लिए सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है. सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव, श्रीहरि और माता लक्ष्मी की उपासना की जाती है. सोमवती अमावस्या को पिठोरी अमावस्या, भादो अमावस्या और भाद्रपद अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस तिथि को सोमवती अमावस्या मनाई जाती है.
शास्त्रों के अनुसार ये साल की दूसरी सोमवती अमावस्या है. इस दिन किए गए कुछ उपाय और पूजा पाठ पितरों की आत्मा को शांति दिलाती है. पितरों के आशीर्वाद से व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती के साथ चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन कुछ उपाय करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन रुठे पितरों को मनाकर उनकी आशीर्वाद पाया जा सकता है.

सोमवती अमावस्या 2024 शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि 2 सितंबर यानी आज सुबह 5 बजकर 21 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 3 सितंबर को सुबह 7 बजकर 24 मिनट पर होगा.
अमावस्या स्नान दान का मूहूर्त- सुबह 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 15 मिनट तक रहेगा.
पूजन का मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगा.
सोमवती अमावस्या शुभ योग
सोमवती अमावस्या आज बहुत ही खास मानी जा रही है क्योंकि आज शिव योग, सिद्ध योग और मघा नक्षत्र का निर्माण हो रहा है. शिव योग कल शाम 5 बजकर 50 मिनट पर शुरू हो चुका है और यह योग आज शाम 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा, सिद्ध योग आज शाम 6 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो जाएगा और 3 सितंबर को शाम 7 बजकर 05 मिनट पर समापन होगा.
सोमवती अमावस्या पूजन विधि
इस दिन किसी पवित्र नदी, तालाब या कुंड में स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें. गायत्री मंत्र का पाठ करें. इसके बाद भगवान शिव की पूजा करें. पितरों का तर्पण करें और उनके मोक्ष की कामना करें. पूजा-पाठ के बाद किसी जरूरतमंद को भोजन और वस्त्र का दान करें. इस दिन देवी लक्ष्मी का पूजन करना भी शुभ माना जाता है. सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिन स्त्रियां पीपल की पूजा करती हैं. सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना करके कमजोर चंद्रमा को बलवान किया जा सकता है.
भगवान शिव की कैसे करें उपासना
अमावस्या तिथि पर बेल के पेड़ के नीचे बैठकर स्नान करें और भगवान शिव का महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. इसके साथ ही, भगवान शिव की अभिषेक करें. इस उपाय को करने से व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति होती है. साथ ही, आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
पांच मिठाइयों से करें ये उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न और तृप्त करने के लिए पांच तरह की मिठाई ले लें. इन्हें एक पीपल के पत्ते पर रखें. इसके बाद इन मिठाई को पीपल के पेड़ पर जाकर अर्पित करें और हाथ जोड़कर पितरों से प्रार्थना करें. आखिर में इस प्रसाद को वहीं लोगों में वितरित कर दें.
पीपल का पेड़ लगाएं
सोमवती अमावस्या के दिन एक पीपल का पौधा लें और उसे कहीं सुनसान जगह पर लगा दें. संभव हो तो एक साल तक इस पौधे की सेवा करें. ऐसा करने से व्यक्ति की कुंडली में बना नवग्रह दोष भी दूर होता है. वहीं, अगर संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है, तो उससे भी छुटकारा पाने के लिए करें ये उपाय बेहद कारगार है.
कन्याओं को खिलाएं खीर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अमावस्या तिथि के दिन कन्याओं और 5 ब्राह्मणों को खीर का भोग लगाएं. ऐसा करने से आपको धन प्राप्ति के योग बनते हैं. साथ ही, आर्थिक समस्याओं से भी जल्द छुटकारा मिलता है.
करें सूर्य पुराण का पाठ
बता दें कि सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लगने के कारण सूर्य पुराण का पाठ करना विशेष लाभदायी रहता है. इस उपाय को करने से पितृदोष से मुक्ति मिलेगी. वहीं, सरकारी क्षेत्र से संबंधित कार्यों में सफलता की प्राप्ति होगी. वहीं, अगर कार्यस्थल पर मनमुटाव चल रहा है, तो वह भी समाप्त हो जाएगा.
सोमवती अमावस्या के उपाय
1. सोमवती अमावस्या खीर बनाकर शिवजी को अर्पित करें. कुछ अंश पितरों के नाम से भी निकालें. शिवजी को अर्पित की हुयी खीर निर्धनों में बांटें. पितरों की खीर किसी पशु को खिला दें. सफेद चंदन की लकड़ी नीले धागे में बांधकर पहन लें.
2. पारिवारिक समस्या के लिए स्नान करके नारंगी वस्त्र धारण करें. भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करें. उनके समक्ष “ऊं गौरीशंकराय नमः” का जप करें. सात्विक भोजन बनाकर दान करें.
















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