आज कल्कि जयंती मनायी जा रही है. जानते हैं कि इस मौके पर जानें कि भगवान कल्कि की किस विधि से पूजा करें और इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है. साथ ही जानेंगे कि भगवान विष्णु का 10वां अवतार कैसा होगा.
हर साल सावन शुक्ल षष्ठी तिथि पर कल्कि जयंती मनाई जाती है और यह तिथि इस साल 18 अगस्त 2026, मंगलवार को है. ध्यान दें दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर विष्णु जी के दसवें अवतार को समर्पित पर्व कल्कि जयंती मनाई जाती है. कल्कि भगवान की इस दिन पूजा करने से मन के भय का नाश होता है और पापों से मुक्ति मिलती है. मानसिक शांति भी मिलती है.
भगवान कल्कि की पूजा विधि
➤सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं और स्नान कर सफेद या पीले वस्त्र धारण करें.
➤भगवान का ध्यान कर पूजा का संकल्प करें.
➤पूजा स्थल को साफ करें और एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं.
➤चौकी पर भगवान कल्कि की प्रतिमा स्थापित करें.
➤अब पीले फूल, चंदन, अक्षत, तुलसी पत्ता अर्पित करें.
➤पीली मिठाई या अन्य सभी भोग में तुलसी पत्ता या तुलसी दल डालकर अर्पित करें.
➤धूप-दीप जलाएं और भगवान का ध्यान करें.
➤अब भगवान के मंत्रों का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम का भी पाठ कर सकते हैं.
➤आरती कर पूजा को संपन्न करें और प्रसाद भक्तों में बांटे.
जानें कल्कि अवतार के बारे में: स्कंद पुराण के अनुसार, जब कलियुग चरम पर होगा और हर ओर अधर्म फैला होगा तब विष्णु जी का 10वां अवतार भगवान कल्कि के रूप में होगा. कल्कि अवतार का यह समय कलियुग के अंत और सतयुग के अंत के संधिकाल का होगा.
ऐसी मान्यता है कि भगवान कल्कि 64 कलाओं में निपुण होंगे. कल्कि पुराण के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सम्भल नाम के एक स्थान पर विष्णुयश नाम के एक तपस्वी ब्राह्मण के घर में होगा. गुरु के रूप में भगवान परशुराम भगवान कल्कि को ज्ञान और मार्गदर्शन देंगे. भगवान परशुराम की प्रेरणा से कल्कि भगवान शिव जी की तपस्या करेंगे और दिव्य शक्तियां प्राप्त कर अधर्मियों का नाश करेंगे.
स्कंद पुराण और अग्नि पुराण के अनुसार, भगवान कल्कि घोड़े पर सवार होंगे जिनके हाथों में धनुष-बाण और चमचमाती तलवार होगी. कल्कि भगवान के चार भाई होंगे जो धर्म स्थापना में सहायक होंगे. श्रीमद्भागवत पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, ‘ देवी पद्मा’ देवी लक्ष्मी का अवतार होंगी जिनका विवाह भगवान कल्कि से होगा.
















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