44 साल बाद भारत की बेटियों ने हॉकी में चीन को हरा जीता गोल्ड मेडल, 13वें दिन भारत को 6 गोल्ड मिले

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भारतीय विमेंस हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में 44 साल बाद गोल्ड जीत लिया. टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराया. भारत के लिए एकमात्र गोल लालरेमसियामी ने किया. इससे पहले भारत ने 1982 में साउथ कोरिया को हराकर गोल्ड जीता था.

भारत को एशियन गेम्स के 13वें दिन 6 गोल्ड मिले. बॉक्सर अंकुश पंघाल ने पुरुषों की 80 किग्रा वेट कैटेगरी में गोल्ड जीता, जबकि इससे ठीक पहले सुजीत कलकल ने रेसलिंग के पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल में गोल्ड अपने नाम किया.

शुक्रवार को बॉक्सर परवीन हुड्‌डा ने विमेंस 65 किग्रा और लवलीना बोरगोहेन ने विमेंस 75 किग्रा वेट कैटेगरी में गोल्ड जीता. इसके साथ पहली बार 3 भारतीय मुक्केबाज एक ही एशियन गेम्स में चैंपियन बने.

सुबह भारतीय महिला तीरंदाजी टीम ने रिकर्व इवेंट में गोल्ड जीता था. विमेंस हॉकी के गोल्ड के साथ भारत के कुल 16 गोल्ड हो गए हैं और वह मेडल टैली में 5वें नंबर पर है.

सविता का वो शानदार बचाव… मैच का पहला क्वार्टर भारतीय टीम के नाम रहा. सलीमा टेटे और साक्षी के शानदार मूव के बाद लालरेमसियामी के जोरदार रिवर्स-हिट फिनिश ने निर्णायक भूमिका निभाई. फिर दूसरे क्वार्टर में चीन ने आक्रामक खेल दिखाया. चीनी टीम को दो पेनल्टी कॉर्नर मिले. साथ ही 23वें मिनट में एक पेनल्टी स्ट्रोक भी मिला, जिस पर गोल नहीं हो सका. पेनल्टी स्ट्रोक झांग यिंग ने लिया, लेकिन भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने बेहतरीन बचाव कर गोल होने से बचा लिया.

तीसरे क्वार्टर में भी चीन ने काफी सारे मूव्स बनाए, लेकिन भारतीय गोलकीपर और डिफेंडर्स ने हर अटैक को नाकाम कर दिया. तीसरे क्वार्टर में चीन को कुल तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले. एक मौके पर तो रेफरी ने चीन को पेनल्टी स्ट्रोक थमा दिया था, लेकिन भारतीय टीम के रिव्यू लेने के बाद उसे केवल पेनल्टी कॉर्नर में तब्दील कर दिया गया.

चौथे क्वार्टर में भी चीनी खिलाड़ियों ने आक्रमण किए, लेकिन हर हमले को भारतीय डिफेंस ने ध्वस्त कर दिया. चौथे क्वार्टर में हालांकि चीन को कोई पेनल्टी कॉर्नर नहीं मिला, जो टीम इंडिया के लिए अच्छी बात रही. जैसे ही फाइनल सीटी बजी, भारतीय टीम और फैन्स जश्न में डूब गए.

एशियन गेम्स में महिला हॉकी की शुरुआत 1982 में हुई थी. पहले ही संस्करण में भारत ने गोल्ड मेडल जीत लिया था. उसके बाद भारत ने अब इस इवेंट में स्वर्णिम सफलता हासिल की है. भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1998 और 2018 में फाइनल तक का सफर किया, लेकिन क्रमश: साउथ कोरिया और जापान से हार के चलते रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा. 1986, 2006, 2014, 2022 के संस्करण में भारतीय महिला हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीते.

भारतीय टीम: बिछू देवी (गोलकीपर), सलीमा टेटे (कप्तान), नवनीत कौर, निक्की प्रधान, दीपिका, लालरेमसियामी, नेहा, ज्योति, सुशीला चानू, इशिका चौधरी, सुनेलिता टोप्पो, शिल्पी डबास, सविता पूनिया (गोलकीपर), इशिका, साक्षी राणा, ऋतुजा दादासो पिसल, लालथंतलुआंगी, बलजीत कौर.

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