गणेश विसर्जन पर पंचक का साया, जानें कब से कब तक रहेगा ये अशुभ समय? ना करें ये काम

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सितंबर महीने के पंचक ऐसे समय में पड़ रहे हैं, जब गणेश उत्‍सव जैसे महत्‍वपूर्ण पर्व का समापन होगा और पितृ पक्ष प्रारंभ होंगे. यानी कि इस साल गणपति बप्‍पा की विदाई पंचक के साए में होगी. जानिए इस महीने पंचक कब से कब तक हैं और इस दौरान क्‍या न करें.

हर 27 दिन में जब चंद्रमा कुंभ, मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है, तब पंचक लगते हैं. हिंदू धर्म और ज्‍योतिष के अनुसार, यह 5 दिन का वो समय होता है, जिसमें शुभ कार्य समेत कई सामान्‍य कार्य करना भी वर्जित होता है. सितंबर महीने में पंचक 23 सितंबर 2026 यानी कि आज से प्रारंभ हो रहे हैं. इससे 2 दिन बाद 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन करके बप्‍पा को विदाई दी जाएगी. यानी कि इस दौरान भक्‍त पंचकों के दौरान गणपति बप्‍पा को विदाई देंगे.

द्रिक पंचांग के अनुसार, 23 सितंबर 2026, बुधवार की रात 09:57 बजे से पंचक प्रारंभ होंगे और 28 अगस्‍त 2026, सोमवार की सुबह 10:16 बजे पंचक समाप्‍त होंगे. इस दौरान चंद्रमा 23 सितंबर की रात 09:56 बजे से 26 सितंबर की सुबह 05:32 बजे तक कुंभ और फिर 28 सितंबर की सुबह 10:15 बजे तक मीन राशि में रहेंगे.

5 दिन में 3 खास मौके: इन 5 दिनों में इन खास मौके आ रहे हैं. 24 सितंबर को गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन होगा, साथ ही भगवान विष्‍णु के अनंत रूप की पूजा की जाएगी. वहीं 26 सितंबर से पितृ पक्ष प्रारंभ होगा.

पंचक में गणेश विसर्जन हो सकता है? जी हां, पंचक में गणेश विसर्जन करने में कोई बाधा नहीं होती है. पंचक के दौरान पूजा-पाठ धार्मिक अनुष्‍ठान किए जा सकते हैं, उस पर गणपति बप्‍पा तो विघ्‍नहर्ता हैं, यानी कि अपने भक्‍तों के दुख हरने वाले हैं. ऐसे में पंचक के दौरान भी पूरे भक्ति भाव और उत्‍साह से गणपति बप्‍पा को विदाई दें.

इसी तरह श्राद्ध कर्म करने में भी पंचक के कारण कोई बाधा नहीं है. 26 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहे हैं, पहले ही दिन से अपने पूर्वजों की आत्‍मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि विधिव‍त तरीके से किए जा सकते हैं.

ये काम करने से बचें: सितंबर के पंचक बुधवार के दिन से प्रारंभ हो रहे हैं और इन पंचकों को शुक्रवार (चोर पंचक), शनिवार (मृत्‍यु पंचक) और मंगलवार (अग्नि पंचक) से लगने वाले पंचक की तरह बेहद अशुभ नहीं माना गया है. लिहाजा इस दौरान केवल वही काम करने की मनाही है जो पंचकों में सामान्‍य तौर पर नहीं किए जाते हैं, जैसे –

➤लकड़ी और लकड़ी का सामान न खरीदें.
➤बिस्‍तर-पलंग न खरीदें.
➤नए घर का निर्माण प्रारंभ, छत डलवाना, पहली चौखट लगवाने जैसे काम भी पंचक में नहीं करने चाहिए.
➤दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए.

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