रामलला को अब लगने लगी सर्दी, गर्म पानी से स्नान हुआ शुरू, पहनाए गए गर्म कपड़े…लगा ब्लोअर

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नवंबर लगने के साथ ही अयोध्या के रामलला को सर्दी लगनी शुरू हो गई है. इसे देखते हुए उन्हें अब गर्म पानी से स्नान कराया जा रहा है. साथ ही उनके भोग में भी बदलाव किया गया है. रामलला की बालरूप की सेवा की जाती है. ऐसे में रामलला को भी ठंड से बचाने के लिए कंबल-रजाई सहित ऊनी वस्त्र पहनाए जा रहे हें.

श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य अर्चक सत्येंद्र दास ने बताया कि राम जन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला को ठंड से बचाने के लिए ब्लोअर लगाया गया है. रामलला के लिए तीन जोड़ी रजाई गद्दा व गर्म कपड़े बनाए गए हैं. रामलला को गर्म पानी से स्नान कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि रामलला चूंकि बाल रूप में विराजमान हैं इसलिए बालक के भाव से ही उनकी सेवा की जाती है. पचपेड़ा गौशाला राजस्थान की तरफ से भेंट किए गए शुद्ध गाय के देशी घी से ही रामलला के लिए पकवान बनाकर उन्हें भोग लगाया जा रहा है.

देसी घी से ही रामलला के समक्ष अखंड दीप जलाया जा रहा है. रामनगरी के मठ-मंदिरों में भगवान को ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह के जतन किए जा रहे हैं. रामनगरी के मंदिरों दशरथ महल बड़ास्थान, विअहुति भवन, जानकी महल ट्रस्ट, कनकभवन, हनुमानगढ़ी, श्रीरामबल्लभाकुंज, सियारामकिला, लक्ष्मण किला सहित सभी मंदिरों में भगवान की सेवा मौसम के अनुकूल की जा रही है.

बालक राम को सुबह 4:30 बजे ही जगाया जाता है और उन्हें स्नान कराया जाता है. उन्हें ठंड न लगे, इसलिए अब उन्हें गुनगुने पानी से स्नान कराया जाता है. साथ ही भोग में भी बदलाव किया गया है.

भोग में रबड़ी व पेड़ा दिया जा रहा है। ड्राई फ्रूट्स जैसे काजू, बादाम व पिस्ता भी दिया जा रहा है. बादाम व पिस्ता मिलाकर गर्म दूध दिया जा रहा है। भोजन में पूड़ी व हलुआ परोस रहे हैं. ठंड बढ़ने पर कुछ और बदलाव किए जाएंगे. गर्भगृह में अब कूलर नहीं चलाए जा रहे हैं. पंखे का उपयोग केवल दोपहर में ही किया जा रहा है. ठंड को देखते हुए रामलला की दर्शन अवधि में पहले ही बदलाव किया जा चुका है. 

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