राहुल गांधी का विरोध का अनोखा अंदाज, राजनाथ सिंह को दिया तिरंगा और गुलाब

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कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने विरोध जताने के लिए संसद परिसर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को गुलाब का फूल और तिरंगा भेंट किया. जैसे ही राजनाथ सिंह संसद में एंट्री करने के लिए अपनी कार से उतरे, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता उनके पास पहुंचे और उन्हें गुलाब का फूल और तिरंगा भेंट किया.

यह वाकया संसद के बाहर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के वक्त हुआ, जिसमें केंद्र सरकार पर अमेरिका में अडानी के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया गया.

‘देश मत बिकने दो…’

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि हम गांधी के रास्ते पर संसद में सत्तापक्ष के सांसदों को तिरंगा और गुलाब देकर ये अपील कर रहे हैं कि अडानी के हाथों देश को मत बिकने दो. उन्होंने कहा, “मौजूदा सरकार संसद को न चलने देने की कसम खाई है. विपक्ष लगातार राहुल गांधी के नेतृत्व में अपील कर रहा है कि सदन चलाइए और अडानी की लूट पर चर्चा करिए, लेकिन सरकार अडानी को बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है.”

सत्र की शुरुआत से ही प्रोटेस्ट

20 नवंबर को सत्र शुरू होने के बाद से, दोनों सदनों में इस मुद्दे पर लगातार व्यवधान देखने को मिल रहे हैं. 20 नवंबर को सेशन शुरू होने के बाद से, दोनों सदनों में कई मुद्दों पर लगातार हंगामे देखने को मिल रहे हैं.

कांग्रेस ने अडानी मुद्दे पर चर्चा की मांग की, वहीं बीजेपी ने आरोप लगाया कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस के अरबपति परोपकारी जॉर्ज सोरोस से संबंध हैं, उन्होंने सोरोस फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित एक संगठन के साथ संबंध होने का दावा किया, जिसने कथित तौर पर कश्मीर को भारत से अलग करने के विचार का समर्थन किया था. 

धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

मंगलवार (10 दिसंबर) को विपक्षी गंठबंधन INDIA ब्लॉक दलों ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटाने के लिए राज्यसभा में प्रस्ताव लाने के लिए एक नोटिस दिया किया. उन्होंने उच्च सदन के अध्यक्ष के रूप में उन पर “पक्षपातपूर्ण” आचरण का आरोप लगाया. अगर प्रस्ताव पेश किया जाता है, तो इसे पारित कराने के लिए इन दलों को साधारण बहुमत की जरूरत होगी. 

हालांकि, 243 सदस्यीय सदन में उनके पास जरूरत के मुताबिक तादाद नहीं है. फिर भी, विपक्षी सदस्यों ने जोर देकर कहा कि यह संसदीय लोकतंत्र के लिए लड़ने का एक कड़ा संदेश है.

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