सूर्य का किसी राशि में प्रवेश संक्रांति कहलाता है. जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे धनु संक्रांति कहा जाता है. खरमास एक वर्ष में दो बार लगता है. जब सूर्य मीन और धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो उस अवधि को क्रमशः मीन और धनु खरमास के नाम से जाना जाता है. धनु राशि बृहस्पति की आग्नेय राशि है और इसमें सूर्य का प्रवेश विशेष परिणाम पैदा करता है. बीमारियां और रोग बढ़ते हैं. लोगों के मन में खूब सारी चंचलता आ जाती है. ज्योतिषीय कारणों से शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं. इसलिए इसे धनु खरमास भी कहते हैं. 15 दिसंबर को सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करते ही धनु खरमास आरंभ हो जाएगा. 15 दिसंबर को सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करते ही धनु खरमास आरंभ हो जाएगा और 14 जनवरी 2025 तक रहेगा.
धनु खरमास में क्यों नहीं करते शादी?
ज्योतिषविद कहते हैं कि किसी भी विवाह का सबसे बड़ा उद्देश्य सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. धनु राशि को सम्पन्नता की राशि माना जाता है. इस समय सूर्य धनु राशि में चला जाता है, जिसको सुख समृद्धि के लिए अच्छा नहीं माना जाता है. कहते हैं कि इस समय अगर विवाह किया जाए तो सुख मिलने के योग कम होते हैं
धनु खरमास में क्यों नहीं करते मंगल कार्य?
द्विरागमन, कर्णवेध और मुंडन जैसे मंगल कार्य धनु खरमास की अवधि में वर्जित हो जाते हैं. धनु राशि यानी अग्नि भाव में सूर्य का होना है, जो स्थितियों को बिगाड़ सकता है. इस दौरान किए गए कार्य या रिश्ते खराब हो सकते हैं.
धनु खरमास में क्यों नहीं शुरू करते नया काम?
धनु खरमास में नया व्यवसाय आरम्भ करना आर्थिक मुश्किलों को जन्म देता है. क्योंकि इस समय बिना चाहे खर्चे काफी बढ़ सकते हैं. इस अवधि में शुरू किए हुए व्यवसाय बीच में रुक जाते हैं. व्यवसाय में काफी कर्ज हो जाता है और धन का वापस आना मुश्किल हो जाता है.
धनु खरमास में क्यों नहीं खरीदते संपत्ति?
संपत्ति बनाने का उद्देश्य संपत्ति का सुख पूर्वक उपभोग करना है. अगर इस समय में मकान बनाया जाएगा तो उसका सुख मिल पाना काफी कठिन होगा. अगर ऐसा प्रयास किया जाए तो बाधाओं के कारण काम फंस भी जाते हैं. कभी-कभी दुर्घटनाओं की संभावनाएं भी बन जाती हैं. इस अवधि में बनाए गए मकान आमतौर पर कमजोर होते हैं और उनसे निवास का सुख नहीं मिल पाता है.
खरमास की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यदेव अपने 7 घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाते हैं, जिससे समय की गति बनी रहती है. कहते हैं कि लंबे समय तक लगातार चलने के कारण सूर्यदेव के घोड़े थककर कमजोर हो गए. जब सूर्यदेव ने घोड़ों की दयनीय स्थिति देखी, तो उन्हें उन पर दया आई.
सूर्य देव घोड़ों को आराम देने के लिए एक तालाब के पास ले गए. लेकिन, रथ रोकना संभव नहीं था, क्योंकि रथ रुकने से जनजीवन ठहर जाता. तभी उन्होंने तालाब के पास दो गधे देखे और उन्हें रथ में जोत दिया. गधों के कारण रथ धीमी गति से चलने लगा. यह स्थिति एक महीने तक बनी रहती है, जिसे खरमास कहा जाता है.
खरमास के दौरान, सूर्य देव के रथ के 7 घोड़े विश्राम करते हैं. जब यह समय समाप्त होता है और मकर संक्रांति का आगमन होता है, तो सूर्यदेव के रथ को घोड़े फिर से खींचने लगते हैं. इससे सूर्य का तेज लौट आता है और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है.
समस्या आने पर करें ये उपाय
यदि धनु खरमास के चलते आपके जीवन में कोई समस्या आए तो रोज सुबह हल्दी मिला हुआ जल सूर्य देव को अर्पित करें. हल्दी या केसर का तिलक लगाएं. रोज शाम को शनि मंत्र का जप करें. शनिवार शाम को पीपल के नीचे दीपक जलाएं.
















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