बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमलावर हो रहा है. चुनाव आयोग ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि ‘वोट चोरी’ जैसे भ्रामक शब्दों का उपयोग कर जनता को गुमराह करने की कोशिश संविधान का अपमान है.अब विपक्ष इसमें एक कदम आगे बढ़ गया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहा है.
सूत्रों के मिली जानकारी के अनुसार, विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) के खिलाफ लामबंद हो गया है और संसद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दफ्तर में सोमवार को विपक्षी नेताओं की हुई बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया है. यह बैठक मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई, जिसमें इंडिया गठबंधन के नेताओं ने हिस्सा लिया था.
यह कदम लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी द्वारा महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाने के बाद उठाया गया है. उन्होंने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में मतदाता डेटा में हेरफेर करने का आरोप लगाया था. 7 अगस्त को उन्होंने दावा किया था कि बेंगलुरु सेंट्रल के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 ‘चुराए गए’ वोटों ने भाजपा को लोकसभा चुनाव में जीत दिलाई. उन्होंने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ दल के साथ ‘मिलीभगत’ का आरोप भी लगाया था.
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) के खिलाफ महाभियोग लाने का फैसला किया है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है. क्योंकि, किसी भी महाभियोग प्रस्ताव के लिए संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, जो विपक्ष के पास नहीं है. महाभियोग (Impeachment) एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा संसद, राष्ट्रपति या किसी अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी को उनके पद से हटाया जा सकता है.













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