साल की आखिरी शनि अमावस्‍या आज: 5 राशि वाले जरूर इसे करें, निजात पाएं साढ़ेसाती-ढैय्या से

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सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है. यह दिन पितरों को समर्पित होता है. इस तिथि पर पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है. अगर अमावस्या शनिवार के दिन पड़े तो इसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है. यह तिथि जब शनिवार के साथ पड़ती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. आज साल की आखिरी शनि अमावस्या है. यह साल की आखिरी शनि अमावस्या है.

5 राशियों पर चल रही साढ़ेसाती-ढैय्या: मेष, कुंभ और मीन राशि पर इस समय शनि की साढ़ेसाती चल रही है. वहीं धनु और सिंह राशि वालों पर शनि की ढैय्या का साया है. इसके अलावा जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष है, ऐसे सभी जातक आज शनि अमावस्‍या पर शनि को प्रसन्‍न करने के उपाय कर लें.

शनि अमावस्या का महत्व: सनातन धर्म में शनि अमावस्या का विशेष महत्व होता है. इस तिथि पर श्रद्धापूर्वक शनि देव की पूजा की जाती है. साथ ही मनोवांछित फल पाने के लिए व्रत भी रखा जाता है. शनि जयंती पर मंदिरों में विशेष आयोजन होता है. शास्त्रों के अनुसार, यह दिन शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है. अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है.

शनि अमावस्‍या के उपाय: भाद्रपद महीना भगवान कृष्‍ण को समर्पित है. चूंकि भाद्रपद अमावस्‍या शनिवार को है इसलिए आज शनि देव और भगवान कृष्‍ण दोनों की पूजा-अर्चना करें. इससे शनि के कष्‍ट जल्‍दी दूर होंगे. इसके लिए श्रीकृष्ण को गुरु रूप में स्थापित करें. फिर उन्‍हें पीले फूल और तुलसी दल चढ़ाएं. भगवान को चंदन लगाएं, फिर स्‍वयं को लगाएं. भजन-कीर्तन, जाप करें. पूरे दिन सात्विक भोजन करें, सात्विक विचार ही मन में लाएं.

  • “ऊं कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने. प्रणत: क्लेश नाशाय, गोविन्दाय नमो-नमः..” मंत्र का सुबह और शाम जाप करें.
  • शनि के मंत्र ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ का जाप करें.
  • शनि अमावस्या के दिन शनि देव की विधिवत पूजा करें. फिर कम से कम 108 बार “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें. इससे साढ़ेसाती ढैय्या का नकारात्‍मक प्रभाव दूर होता है. तनाव बाधाओं से निजात मिलती है.
  • संभव हो तो शनि अमावस्या पर व्रत रखें. पूरे दिन केवल फलाहार करें. शाम को शनि मंदिर जाकर शनि की पूजा करें. शनि देव के चरणों में काले तिल, सरसों का तेल अर्पित करें. गलती से भी शनि देव की मूर्ति के ठीक सामने खड़े ना हो, ना ही उनकी आंखों में देखें.
  • पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
  • शनि अमावस्‍या के दिन गरीबों को दान करें. इस दिन शनि देव से संबंधित वस्तुओं काले कपड़े, कंबल, काली उड़द की दाल, काले तिल, लोहे के बर्तन, सरसों का तेल आदि का दान करना लाभ देता है. शनि की पीड़ा दूर होती है.

साढ़ेसाती-ढैय्या से बचने के लिए ऐसे करें पूजा: यदि शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा से राहत पाना चाहते हैं तो शनि अमावस्या के दिन पवित्र नदी या तालाब में स्नान करें. स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें. इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर घर के मंदिर में दीपक जलाएं. इस दिन श्रद्धापूर्वक सरसों के तेल में काले तिल मिलाकर शनिदेव का अभिषेक करें. उन पर फूल चढ़ाएं और शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें. शनि अमावस्या पितृ तर्पण और पितृ दोष निवारण के लिए भी खास मानी जाती है. इस दिन पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करना चाहिए. मान्यता है कि इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है.

इस दिन न करें ये गलतियां: शनि अमावस्या पर नशा, मांसाहार और तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है. ऐसा करने से पितरों की कृपा नहीं मिलती और शनिदेव भी अप्रसन्न हो सकते हैं. इस दिन बाल और नाखून काटना या नए कार्य की शुरुआत करने से बचें. लोहे का नया सामान खरीदकर लाने से परहेज करें. अमावस्या आत्मचिंतन, साधना और पितरों की शांति के लिए समर्पित दिन है, इसलिए इसे पूजा-पाठ और दान-पुण्य में लगाना चाहिए.

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