ट्रंप टैरिफ पर कानपुर में चुनावी हवन से सियासी दहन तक का हलचल, जलाये गए पोस्टर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत में लोकप्रियता का बहुत जल्दी पतन हो गया. राष्ट्रपति के चुनाव में ट्रंप की जीत के लिए जहां दस महीने पहले उत्तर प्रदेश के अयोध्या, प्रयागराज और मेरठ जैसे शहरों में हवन चल रहा था, आज कानपुर में उनका फोटो दहन चल रहा है. कानपुर में व्यापारियों ने ना सिर्फ ट्रंप का पोस्टर जलाया बल्कि लोगों से अपील की है कि वो भी अमेरिकी कंपनियों के सामान का बहिष्कार करके जवाबी चोट दें.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही सुर-ताल बिगड़ा हुआ है. पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई के दौरान युद्ध-विराम को लेकर ट्रंप के एकतरफा दावों से व्यापार समझौते में पहले से बना गतिरोध और गहरा चुका है. रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है. सूरत से कानपुर तक व्यापारियों के बीच एक्सपोर्ट बिजनेस की चिंता हैं, क्योंकि सामान का अमेरिकी धरती पर पहुंचना 50 परसेंट महंगा हो गया है.

उत्तर प्रदेश के बड़े व्यापारिक केंद्र कानपुर में व्यापारियों ने बुधवार को ट्रंप टैरिफ के विरोध में पोस्टर जलाया. व्यापार मंडल ने किदवई नगर चौक पर अमेरिकी कंपनियों के भी पोस्टर फूंके. व्यापारियों ने लोगों से अमेरिकी कंपनियों के सामान के बहिष्कार की अपील की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला से और उसके बाद कई कार्यक्रमों में स्वदेशी चीजें अपनाने की अपील की है. मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल के हवाले से पीएम मोदी ने त्योहारों की शुरुआत से पहले दुकानदारों से भी स्वदेशी सामान बेचने का बोर्ड लगाने कहा है.

कानपुर में भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में ट्रंप का पोस्टर दहन हुआ। उनके साथ केके गुप्ता, रमेश केसरवानी, नीरज शुक्ला, विनायक पोद्दार, पवन गौड़, जय शर्मा समेत कई कारोबारी विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे। ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि ट्रंप ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर भारत के साथ विश्वासघात किया है।

ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर दुकानों के बाहर स्वदेशी अपनाओ वाले बोर्ड लगाकर देश के व्यापारियों को भी अमेरिका को जवाब देना चाहिए। मिश्र ने आम लोगों से भी अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करके जवाब देने की अपील की है, जिससे अमेरिका का भी उतना ही आर्थिक नुकसान हो।

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