कार्तिक मास कल से प्रारम्भ, भगवान विष्‍णु -माता लक्ष्‍मी की कृपा पाने का सर्वोत्तम समय

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कार्तिक मास कल 8 अक्‍टूबर से प्रारंभ हो रहा है और 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर समाप्‍त होगा. कार्तिक महीने में ब्रह्म मुहूर्त में स्‍नान करने, पूजा करने और कार्तिक मास की कथा पढ़ने का बड़ा महत्‍व है. भगवान विष्‍णु और मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करके उनकी कृपा पाने के लिए कार्तिक मास सर्वोत्‍तम माना गया है. कार्तिक मास में अलसुबह स्‍नान करने, भगवान विष्‍णु और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने, तुलसी पूजा करने और दीपदान करने का बड़ा महत्‍व है. साथ ही पूजा में कार्तिक मास की कथा जरूर पढ़नी चाहिए. ऐसा करने से भगवान की कृपा से पूरे साल अपार धन-समृद्धि और सुख मिलता है. 

इस पवित्र महीने में भजन-कीर्तन, स्नान-दान, दीपदान और तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान स्नान-दान, दीपदान और तुलसी पूजन करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी पापों का नाश होता है. साथ ही, जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है.

कार्तिक मास का धार्मिक महत्व: सनातन धर्म में कार्तिक मास को सबसे पुण्यकारी महीना माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ होता है. कहा जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी पापों का नाश होता है. वहीं, इस पवित्र महीने में भजन-कीर्तन, दीपदान और तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस माह में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. आपको बता दें कि कार्तिक मास के दौरान कई बड़े त्यौहार जैसे करवा चौथ, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पर्व मनाए जाते हैं.

कार्तिक मास में स्नान-दान का महत्व: हिंदू मान्यता के अनुसार इस पावन महीने में भगवान विष्णु जल में निवास करते हैं. इसलिए गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है. अगर नदी या तीर्थ पर जाकर स्नान संभव न हो तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए. इसके साथ ही इस महीने में दान करने की भी बड़ी महत्ता बताई गई है.

कार्तिक मास 2025 में दीपदान का विशेष महत्व: कार्तिक मास को दीपदान का महीना भी कहा जाता है. इस दौरान रोज सुबह और शाम तुलसी के पौधे तथा मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाना बेहद शुभ माना गया है. तुलसी जी की पूजा करने और उनकी परिक्रमा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और शांति आती है. ऐसा कहा जाता है कि इस महीने दीपदान करने से मां लक्ष्मी बेहद प्रसन्न होती है.

कार्तिक मास के नियम

➤इस पवित्र मास में भगवान विष्णु और कृष्ण के मंत्रों का अधिक से अधिक जप करना चाहिए,
➤इसके साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी गई है;
➤लक्ष्मी जी का आशीर्वाद पाने के लिए इस दौरान श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र, लक्ष्मी स्तोत्र और श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए;
➤कार्तिक मास श्रीकृष्ण की पूजा के लिए भी सबसे उत्तम माना गया है;
➤कार्तिक मास को दीपदान का महीना भी कहा जाता है। इस दौरान नियमित रूप से तुलसी के पौधे तथा मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए;
➤मान्यता है कि इस महीने में गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है;
➤कार्तिक मास में आपको वाद-विवाद से बचना चाहिए. इसके साथ ही मन को संयम रखें और किसी की निंदा न करें.

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