5 दिन के दीपावली महापर्व का समापन भाईदूज से होता है. भाईदूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाते हैं. इस साल दिवाली महापर्व 6 दिन का होने से भाई दूज मनाने की तारीख को लेकर लोगों में खासी उलझन है. तिथियों के घालमेल के कारण लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि भाईदूज 22 अक्टूबर को मनाना शुभ रहेगा या 23 अक्टूबर को लेकिन आज 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जा रहा है. गोवर्धन पूजा के दिन गायों की आराधना की जाती है, जिन्हें देवी लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है. साथ ही, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की विशेष पूजा की जाती है. यह पर्व अन्नकूट उत्सव के नाम से भी प्रसिद्ध है. इस पर्व को उत्तर भारत में खासकर ब्रज भूमि मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल, बरसाना में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है.
आइए अब जानते हैं कि भाईदूज की सही तारीख आखिर कब है या कब मनाना उचित है?
भाई दूज 2025 तिथि: पंचांग के अनुसार इस साल कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर को रात 8 बजकर 17 मिनट पर शुरू हो रही है और 23 अक्टूबर को रात 10 बजकर 47 पर समाप्त होगी. चूंकि भाईदूज पर्व सुबह या दोपहर को मनाना ही शुभ होता है. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार भाईदूज का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाना शास्त्र सम्मत होगा.
भाई दूज का शुभ मुहूर्त: 23 अक्टूबर को भाईदूज मनाने के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 2 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. इसी समय में भाईदूज की पूजा करना सर्वोत्तम रहेगा. 23 अक्टूबर को भाईदूज का टीका लगाने के लिए 12 बजकर 05 से 1 बजकर 30 मिनट तक शुभ चौघड़िया रहेगा. वहीं 1 बजकर 30 मिनट से 2 बजकर 54 मिनट तक अमृत चौघड़िया होगा. अमृत चौघड़िया में भाईदूज मनाना और बहन के हाथों से अन्न-जल लेना भाई बहन के रिश्ते को मजबूत करेगा और भाई की अकाल मृत्यु का भय टालेगा.
दरअसल, मान्यता है कि जो व्यक्ति भाईदूज के दिन अपनी बहन के घर जाकर बहन से टीका लगवाता है और उसके हाथ से बना भोजन ग्रहण करता है, उसे अकाल मृत्यु का खतरा नहीं रहता है. इसके पीछे एक कथा है कि यमराज ने द्वितीया तिथि के दिन अपनी बहन यमुना के घर भोजन किया था और यह वरदान दिया था कि जो भाई दूज के दिन बहन के घर जाएंगे और भोजन करेंगे उसकी अकाल मृत्यु नहीं होगी.

गोवर्धन पूजा आज: पुराणों के अनुसार, गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र देव के प्रकोप से सुरक्षित रखा था. इस घटना के बाद भगवान इंद्र को अपने अहंकार का बोध हुआ. तभी से श्रद्धालु इस दिन श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाते हैं, जिसमें गेहूं, चावल, बेसन और विभिन्न पत्तेदार सब्जियों से बने व्यंजन शामिल होते हैं.
गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त: गोवर्धन पूजा की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर की शाम 5 बजकर 54 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 22 अक्टूबर यानी आज रात 8 बजकर 16 मिनट पर होगा.
गोवर्धन पूजन के लिए ये मुहूर्त रहेंगे
➤एक मुहूर्त सुबह 6 बजकर 26 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा.
➤दूसरा मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 29 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा.
➤तीसरा मुहूर्त शाम 5 बजकर 44 मिनट से लेकर 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.
गोवर्धन पूजा की उपासना विधि: गोवर्धन पूजा के दिन सुबह उठकर पहले हल्की मालिश करके नहाना चाहिए. उसके बाद घर के मुख्य दरवाजे या आंगन में गाय के गोबर से छोटा सा गोवर्धन पर्वत बनाएं. इसके आस-पास पेड़-पौधे, छोटे-छोटे ग्वाल और बैलों की आकृतियां भी सजाई जा सकती हैं. गोवर्धन पर्वत के बीच में भगवान कृष्ण की छोटी मूर्ति रखें और उनके सामने अन्नकूट का भोग लगाएं. पूजा के बाद व्रत की कहानी सुनें, प्रसाद बांटें और फिर सभी मिलकर भोजन करें.
गोवर्धन पूजा कथा : गोवर्धन पूजा करने के पीछे धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण इंद्र का अभिमान चूर करना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर गोकुल वासियों की इंद्र से रक्षा की थी. माना जाता है कि इसके बाद भगवान कृष्ण ने स्वंय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का आदेश दिया दिया था. तभी से गोवर्धन पूजा की प्रथा आज भी कायम है और हर साल गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है.
















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