कानपुर में सागर हाईवे पर बिधनू के शम्भुहा पुल के पास शनिवार देर रात सड़क हादसा हुआ. इसके बाद हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए. हाईवे पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई. रविवार सुबह तक करीब 50 किलोमीटर लंबा जाम लग गया. हजारों वाहन चालक, यात्री और एंबुलेंस घंटों तक फंसी रहीं.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शम्भुहा पुल के पास कई वाहन टकराने की सूचना पर पुलिस पहुंची. NHAI की क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क किनारे कराकर कुछ देर में यातायात चालू करा दिया गया. इसके बाद पुलिस बल मौके से वापस लौट गया। हालांकि, रात में घना कोहरा छा गया, जिससे वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ता चला गया. एंबुलेंस ड्राइवर ने बताया- 1 किमी की दूरी तय करने में घंटेभर का समय लग गया.

सुबह तक 50 किलोमीटर लंबा जाम: रातभर वाहनों की कतारें बढ़ती रहीं और सुबह तक हाईवे पर जाम करीब 50 किलोमीटर तक फैल गया. खड़ेसर से लेकर पतारा चौकी क्षेत्र तक ट्रक, बस, कार और अन्य भारी वाहन जाम में फंसे नजर आए। यात्रियों को न तो खाने-पीने की सुविधा मिल पाई और न ही समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सके. कई एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहीं, जिससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली.
चौकी प्रभारियों की लापरवाही का आरोप: स्थानीय लोगों और राहगीरों ने खड़ेसर और पतारा चौकी इंचार्ज पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस तैनात कर ट्रैफिक को कंट्रोल किया जाता और डायवर्जन लागू किया जाता, तो जाम इतना भयावह नहीं होता.
एसीपी बोले- डायवर्जन कर यातायात बहाल कर रहें: घाटमपुर एसीपी कृष्णकांत यादव ने बताया कि हाईवे पर भारी जाम की सूचना मिलते ही पुलिस को अलर्ट किया गया है. उन्होंने कहा कि यातायात को सुचारु करने के लिए डायवर्जन लागू किया जा रहा है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा रहा है. जल्द ही स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है.

हाईवे पर ट्रकों की लंबी लाइन लगी है. कई ड्राइवर सड़क किनारे गाड़ी खड़ी कर दिए हैं.
यात्रियों में गुस्सा, व्यवस्था पर उठे सवाल: घंटों जाम में फंसे यात्रियों में पुलिस और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे व्यस्त मार्ग पर हादसे के बाद स्थायी निगरानी और ट्रैफिक प्रबंधन बेहद जरूरी है, लेकिन इस मामले में भारी चूक हुई है.
फिलहाल पुलिस और प्रशासन यातायात बहाल करने में जुटा है, लेकिन यह घटना एक बार फिर हाईवे पर ट्रैफिक प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है.
















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