फतेहपुर धर्मांतरण प्रकरण: प्रार्थना सभा में 11 सौ रूपए से लेकर नौकरी का दिया जाता था लालच

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रिजवान उददीन, फतेहपुर।
फतेहपुर के राधानगर थाना क्षेत्र के देवीगंज में चर्च के अंदर धर्मांतरण कराने के आरोप में नामजद तीनों आरोपियों- पादरी डेविड ग्लेडविन, उसका पुत्र अभिषेक ग्लेडविन और कृष्ण गोपाल विश्वास को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इस मामले प्रलोभन की सबसे चौकाने वाली बात या सामने आयी कि महज प्रार्थना सभा में शामिल होने की बाबत 1100 रुपये दिए जाते थे. यही नहीं बच्चों की पढ़ाई और नौकरी का लालच भी दिया जाता था.

प्रचार वाहनों का सहारा: प्रार्थना सभा में भीड़ जुटाने के लिए प्रचार वाहनों का सहारा लिया जा रहा है. विभिन्न कंपनियों के पोस्टर लगे वाहनों से लोग गांवों में पहुंचकर प्रार्थना सभा में शामिल होने का आमंत्रण दे रहे हैं. इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले देव प्रकाश ने बताया कि इससे पहले भी कई बार चार पहिया वाहनों से लोग गांवों में आए हैं. वाहनों पर कंपनियों के विज्ञापन लगे होते हैं और घरों में ईसा मसीह की तस्वीर लगाने व रविवार को चर्च आने की बात कही जाती है.

धार्मिक पुस्तकें मिली: हंगामे के दौरान एक प्रचार वाहन पकड़ा गया. चालक ने अनभिज्ञता जताई। वाहन के भीतर बड़ी संख्या में ईसाई धर्म से जुड़ी धार्मिक पुस्तकें मिली हैं.

मजार प्रकरण से कनेक्शन? हंगामे के दौरान हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं में चर्च पर विरोध के पीछे के हुसैनगंज मजार तोड़ने में नरेंद्र हिंदू को जेल भेजने का गुस्सा फूटता नजर आया. कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बोलते दिख रहे हैं कि पुलिस को खुलेआम धर्मांतरण नहीं दिख रहा है.

इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. हिंदू बस्ती की कथित मजार को तोड़ने में पुलिस ने कार्रवाई की है. यह पुलिस की मनमानी है। पुलिस अधीक्षक कॉल रिसीव नहीं करते हैं. यह मनमानी नहीं चलेगी. इससे साफ है कि चर्च प्रकरण के पीछे हुसैनगंज मामले को हिंदू संगठनों के बीच नाराजगी व्याप्त है.

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