मेरठ में मां की हत्या कर अगवा की गई दलित लड़की का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी युवती का पता नहीं चल सका है. गुरुवार को आरोपी पारस राजपूत ने मां की हत्या कर लड़की का अपहरण कर लिया था. आरोपी के पकड़े जाने और लड़की की सकुशल वापसी तक परिजनों ने शव के अंतिम संस्कार से साफ़ इंकार कर दिया है.
कपसाड़ गांव में परिजन से मिलने जा रहे सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने गांव में घुसने नहीं दिया. उनको गांव के बाहर ही रोक दिया गया, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई. इसके बाद वह गांव के बाहर धरने पर बैठ गए.
सपा, आजाद समाज पार्टी और भारतीय किसान यूनियन के लोग भी पहुंचने लगे हैं. गांव में 10 थानों की पुलिस, RAF और PAC तैनात है.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बसपा चीफ पूर्व सीएम मायावती, सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण आदि ने इस घटना की निंदा करते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पांच टीमें लड़की और आरोपियों की तलाश में लगी हैं। सरधना, ठाकुर चौबीसी, दौराला और कैली गांव में दबिश दी गई। 200 से ज्यादा CCTV कैमरों की जांच की गई, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पारस लड़की को पैदल जंगल के रास्ते ले गया था। करीब पांच किलोमीटर चलने के बाद वह एक सफेद रंग की आल्टो कार में सवार होकर फरार हो गया. दोनों की आखिरी लोकेशन दौराला थाना क्षेत्र के कैली गांव में मिली है. ग्रामीणों ने भी उन्हें वहां देखा था.
वारदात के बाद से आरोपी पारस, उसका दोस्त सुनील और दो अन्य युवक फरार हैं. सभी के मोबाइल फोन बंद हैं. पीड़िता के भाई नरसिंह ने कहा कि 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी बहन का कोई पता नहीं चला है. उन्होंने बहन के साथ अनहोनी की आशंका जताई है और आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाने की मांग की है.
दरअसल, गुरुवार को युवती अपनी मां के साथ खेत की ओर जा रही थी. रास्ते में खड़े एक युवक ने लड़की से छेड़छाड़ की. जब मां ने इसका विरोध किया तो युवक ने गाली-गलौज करते हुए महिला पर फरसे से हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल महिला जमीन पर गिर पड़ी और तड़पने लगी.

इसके बाद आरोपी लड़की को जबरन बाइक पर बैठाकर अगवा कर ले गया. परिजन घायल महिला को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. हालात बिगड़ने की आशंका के चलते पुलिस शव को सीधे पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने लगी.
इसकी जानकारी मिलते ही गांववालों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. लोगों ने एंबुलेंस में तोड़फोड़ की और शव ले जाने से रोक दिया. वे आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए. करीब दो घंटे तक हंगामा चलता रहा.
अधिकारियों के समझाने के बाद हालात शांत हुए और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा सका. उधर, पुलिस ने आरोपी पारस के दादा-दादी को हिरासत में ले लिया, जबकि उसके माता-पिता और भाई अब भी फरार हैं. गांव में तनाव को देखते हुए तीन थानों की फोर्स तैनात कर दी गई है.















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