‘बंटी टैक्स’ के विरोध में बाल मुंडवाने पहुंचे पार्षद, नगर निगम के सामने बैठे, फिर संगठन के लोग उठाकर ले गए

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पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर नगर निगम में पार्षदों और मेयर के बीच चल रहे विवाद में रविवार को अनोखा विरोध देखने को मिला. मेयर के बेटे बंटी पांडेय के विरोध में पार्षदों ने नगर निगम के बेट पर बैठकर अपने बाल मुंडवाने शुरू कर दिए. पार्षदों का कहना था कि हर दिन एक-एक पार्षद बाल मुंडवायेगा.

नगर निगम के गेट पर चल रहे इस हंगामे की सूचना जैसे ही भाजपा के पदाधिकारियों तक पहुंची तो उन्होंने पार्षदों से तत्काल बात की. काफी देर मान मनौव्वल चलने के बाद जब संगठन ने पार्षदों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगे जल्द पूरी की जाएगी, इसके बाद पार्षद बाल न मुंडवाने की बात पर राजी हुए और अपना विरोध खत्म किया.

26 दिसंबर से चल रहा है विवाद: कानपुर नगर निगम में 26 दिसंबर को हुए सदन के बाद से ही भाजपा पार्षदों और मेयर के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है. पार्षद लगातार नगर निगम में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं और मेयर प्रमिला पांडेय के बेटे बंटी पांडेय को इसकी जड़ बता रहे हैं.

पार्षदों का आरोप है कि मेयर ने अपने बेटे बंटी के कहने पर ही उनको सस्पेंड किया था. नगर निगम में होने वाले भ्रष्टाचार को पार्षदों ने बंटी टैक्स का नाम दिया है और वह लगातार इसका विरोध कर रहे हैं. पार्षद संगठन से लेकर डिप्टी सीएम तक लगातार इस मामले की शिकायत कर रहे हैं.

पार्षद पवन गुप्ता नगर निगम के गेट पर बाल मुंडवाने के लिए पहुंचे थे.

नगर निगम के गेट पर बैठे थे पार्षद: वार्ड-37 के भाजपा पार्षद पवन गुप्ता रविवार को नगर निगम के गेट पर बैठ गए और अपने साथ नाई को लेकर गए थे. उनका कहना था कि वह बंटी टैक्स, उनके निलंबन और नगर निगम के भ्रष्टाचार के विरोध में अपने बाल दान करेंगे. इसके बाद सभी 6 पार्षद बारी-बारी ऐसा करेंगे.

पार्षद पवन गुप्ता नगर निगम के गेट पर बाल मुंडवाने के लिए बैठ गए थे, जिसके बाद अन्य लोग उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन वह नहीं मान रहे थे। संगठन के अन्य पार्षदों ने जब इसकी जानकारी जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को दी तो उन्होंने पार्षद से बात करके उन्हें ऐसा करने से रोका.

हमारे सम्मान-स्वाभिमान की हुई थी हत्या: पार्षद पवन गुप्ता ने बताया कि मेयर के पुत्र बंटी पांडेय के लोग लगातार उन्हें धमका रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं. इसकी शिकायत उन्होंने संगठन और वरिष्ठ पदाधिकारियों से की। इसके बाद भी वह नहीं मान नहे हैं जिसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया था.

उन्होंने बताया कि नगर निगम के अंदर ही उनके सम्मान और स्वाभिमान की हत्या हुई थी. इसीलिए वह अपने बाल वहां दान कने के लिए आए थे. हर दिन एक-एक पार्षद अपने बाल दान करने वाला था लेकिन जिलाध्यक्ष के आश्वासन के बाद वह रुके हैं.

पार्षद वेलफेयर खत्म हो, बंटी मुक्त निगम की मांग: पार्षदों ने बताया कि उन्होंने संगठन के सामने अपनी तीन मांगे रखी हैं. इसमें नगर निगम में चलने वाले पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन खत्म हो, बंटी मुक्त नगर निगम हो और उनके निलंबन के आदेश को निरस्त किया जाए. पवन ने बताया कि उनके निलंबन को जल्द खत्म करने की बात कही गई है. इसके साथ ही अन्य दोनों मांगों को भी जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया गया है.

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