UGC Rules 2026: यूजीसी रूल्स 2026 के विरोध में यूपी पीसीएस के अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे की एक वजह शंकराचार्य के अपमान को भी बताया है. इसके अलावा कवि कुमार विश्वास ने भी इन रूल्स का विरोध किया है. इस बीच यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है और भाजपा के भीतर भी इसे लेकर असंतोष की स्थिति है. यही कारण है कि रायबरेली और लखनऊ में भाजपा के नेताओं ने इस्तीफे दिए हैं. इसके अलावा ब्रजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक ने भी इसके प्रति असहमति जाहिर की है. वह भाजपा के विधायक हैं.
धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री, DM से मिलने की अपील: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफे और इसके बाद निलंबन के एक दिन बाद अलंकार अग्निहोत्री मंगलवार को अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट के गेट पर ही धरने कर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा है कि जब तक जिलाधिकारी आकर उनके सवालों के जवाब नहीं देंगे तब तक धरना प्रदर्शन चलता रहेगा।
लखनऊ यूनिवर्सिटी के सामने भी शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन: लखनऊ में भी विरोध शुरू हो गया है। छात्रों ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के सामने जमकर नारेबाजी की है।
यूपी में चल रहा है ब्राह्मण विरोधी अभियान- अलंकार अग्निहोत्री: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने अपना बयान जारी किया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार में काफी समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है। ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। कहीं, एक डिप्टी जेलर एक ब्राह्मण को पीट रहा है। दूसरे पुलिस स्टेशन में, एक दिव्यांग ब्राह्मण को पीट-पीटकर मार डाला गया। माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन, हमारे ज्योतिर मठ (ज्योतिषपीठ) के शंकराचार्य, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के शिष्यों और बुजुर्ग संतों को पैरों, लातों और जूतों से पीटा गया।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अभी भी ब्राह्मण समुदाय के सभी जन प्रतिनिधियों से अपील करता हूं कि वे तुरंत इस्तीफा देना शुरू करें और समुदाय के साथ खड़े हों। समय आ गया है, नहीं तो आपका नरसंहार निश्चित है। सामान्य श्रेणी का नरसंहार निश्चित है क्योंकि आपके जन प्रतिनिधि सो रहे हैं, कॉर्पोरेट कंपनियों के कर्मचारी बनकर बैठे हैं। मैंने राज्यपाल को लिखा है। मैंने अपना इस्तीफा उत्तर प्रदेश के सीईओ और जिला मजिस्ट्रेट को ईमेल के माध्यम से भेज दिया है।”
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में क्या? याचिका में कहा गया है कि हाल ही में नोटिफाई किए गए UGC रेगुलेशन, 2026 का रेगुलेशन 3(c) उन छात्रों और फैकल्टी की सुरक्षा करने में विफल रहता है जो आरक्षित श्रेणियों से नहीं आते हैं। इसमें कहा गया है कि जाति-आधारित भेदभाव के दायरे को केवल SC, ST, और OBC श्रेणियों तक सीमित करके, UGC ने प्रभावी रूप से “सामान्य” या गैर-आरक्षित श्रेणियों से संबंधित व्यक्तियों को संस्थागत सुरक्षा और शिकायत निवारण से वंचित कर दिया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह रेगुलेशन अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 15(1) (धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर राज्य द्वारा भेदभाव पर रोक) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

क्या कहते हैं UGC के नए नियम? नियमों में ‘भेदभाव’ की परिभाषा को विस्तारित करते हुए कहा गया है कि किसी भी हितधारक के खिलाफ धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता अथवा इनमें से किसी भी आधार पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किया गया अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार भेदभाव की श्रेणी में आएगा। साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों को जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर अलग शैक्षणिक व्यवस्था स्थापित करने से रोकने का भी प्रावधान किया गया है। ओबीसी को भी जाति-आधारित भेदभाव के दायरे में शामिल किया गया है।
















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