यूपी एसटीएफ को लखनऊ में बड़ी सफलता मिली है. एटीएस ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल चार आतंकियों को लखनऊ से गिरफ्तार किया है. इनमें दो मेरठ और दो नोएडा के रहने वाले हैं. गिरफ्तार सभी आतंकी सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म से जुड़कर पाकिस्तान हैंडलर के संपर्क में थे. गिरफ्तार आतंकियों में मुख्य आरोपी नाई का काम करता था जो उसकी आड़ में देश के खिलाफ साजिश रच रहा था. एटीएस को सूचना मिलते ही गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के दौरान एटीएस ने उनके पास से एक कैन ज्वलनशील पदार्थ, सात स्मार्टफोन, 24 पम्पलेट और आधार कार्ड बरामद किए हैं.
एटीएस को सूचना मिली थी कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के माध्यमों से एक भारतीय गिरोह, पाकिस्तान हैंडलर के निरंतर संपर्क में है तथा देश विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहा है. गिरोह का मुख्य उद्देश्य देश के महत्त्वपूर्ण संस्थानों तथा राजनैतिक व्यक्तियों की रेकी कर प्राप्त जानकारी को पाकिस्तानी हैंडलर को उपलब्ध कराना तथा योजना बनाकर उन्हें नुक्सान पहुंचाना है. जांच में पाया गया कि गिरोह का मुख्य सदस्य साकिब उर्फ डेविल है, जो नाई का काम करता है. चारों से पूछताछ की जा रही है। गिरोह सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म (टेलीग्राम, सिग्नल, इंस्टाग्राम) के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स, विभिन्न कट्टरपंथी ग्रुपों तथा अफगानिस्तान देश के कई नंबरों से जुड़ा था. यह गिरोह देश की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुँचाने, रेलवे सिग्नल बॉक्स को नष्ट करने, गैस सिलेंडर से भरे ट्रकों में आग लगाने और राजनीतिक व्यक्तियों की रेकी (निगरानी) करने के काम में लगा था.
देश में घटनाओं का वीडियो भेजकर मंगाता था पैसे: एटीएस ने साकिब उर्फ डेविल (25 वर्ष) पुत्र शकील अहमद, अरबाब (20 वर्ष) पुत्र रहीशुद्दीन निवासी अगवानपुर थाना परीक्षितगढ़ जिला मेरठ, 27 वर्षीय विकास गहलावत उर्फ रौनक पुत्र रविंद्र निवासी राम विहार, लोकेश उर्फ पपलात (19 वर्ष) पुत्र रोहताश शर्मा निवासी रामविहार कॉलानी, छपरौला जिला नोएडा को गिरफ्तार किया है. एटीएस की पूछताछ में पता चला है कि गिरफ्तार आतंकियों ने पिछले दिनों कुछ जगहों पर आगजनी की घटनाओं को भी अंजाम दिया था. घटना के बाद आतंकी वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजकर क्यू आर कोड के माध्यम से पैसे मंगाए जाते थे.
पैसों के लालच में रचने लगे थे देश विरोधी साजिश: गिरफ्तार चारों आतंकी पैसों के लालच में देश विरोधी साजिश रचने लगे थे. गिरोह के मुख्य सदस्य ने अपने ही गांव के अरबाब को भी इस काम में शामिल कर लिया था. पैसों का लालच देकर उसने नोएडा के रहने वाले विकास और लोकेश को भी अपने गिरोह में शामिल कर लिया. पूछताछ में पता चला है कि चारों प्रतिष्ठित संस्थानों और वाहनों की रेकी भी करते थे. इस गिरोह ने गाजियाबाद, अलीगढ़, लखनऊ जैसे शहरों में वाहनों, रेलवे सिग्नल बॉक्स की रेकी की थी. घटना के बाद गिरोह ने उसके वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर को भेजे थे. पाकिस्तानी हैंडलीर द्वारा विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों की गूगल लोकेश भेजी जाती थी, जिसके आधार पर रेकी का काम होता था.
















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