विकट संकष्टी व्रत आज: अक्षय तृतीया के समान ही है फलदायी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

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आज 5 अप्रैल रविवार को  ‘विकट संकष्टी चतुर्थी’ का पावन पर्व मनाया जा रहा है. सनातन धर्म में वैशाख मास की इस चतुर्थी का विशेष महत्व है. इसे निर्जला एकादशी और अक्षय तृतीया के समान ही फलदायी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के बड़े से बड़े ‘विकट’ यानी कठिन संकट टल जाते हैं. अगर आप भी आज बप्पा का व्रत रख रहे हैं, तो नोट कर लीजिए कि आज रात चंद्रमा कब उदय होगा.

आज ही क्यों है व्रत?  पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि आज दोपहर 03:42 बजे से शुरू होगी, जो कल 6 अप्रैल को दोपहर 02:18 बजे समाप्त होगी. संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है, चतुर्थी वाली रात आज (5 अप्रैल) ही मिल रही है. इसलिए ज्योतिषीय गणना के आधार पर आज ही व्रत रखना श्रेष्ठ और फलदायी है. 

आज चंद्रोदय और पूजा का शुभ मुहूर्त: गणेश जी की आराधना के लिए शाम का समय सबसे शुभ माना जाता है.

अमृत काल: शाम 05:25 से 07:01 तक (पूजा के लिए सबसे अच्छा समय).

चंद्रोदय (आज का चांद): रात 09:22 बजे. इसी समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा.

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से दोपहर 12:49 तक . 

खास ज्योतिषीय संयोग: दूर होगा ‘चंद्र दोष’ आज की चतुर्थी पर एक बड़ी ज्योतिषीय घटना हो रही है. चंद्रमा आज मंगल की राशि वृश्चिक में गोचर कर रहे हैं. वृश्चिक राशि में चंद्रमा ‘नीच’ के माने जाते हैं, जिससे मन में बेचैनी या तनाव महसूस हो सकता है. ऐसे में आज गणेश जी की पूजा करने से मानसिक शांति मिलेगी .कुंडली के चंद्र दोष दूर होंगे. जो लोग डिप्रेशन या स्ट्रेस महसूस करते हैं, उनके लिए आज का व्रत संजीवनी की तरह है. 

आज शाम कैसे करें पूजा? शाम को शुभ मुहूर्त में गणेश जी की मूर्ति को गंगाजल से साफ कर पीले वस्त्र पहनाएं. गणपति को उनके सबसे प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं. आज बप्पा को 21 दूर्वा (घास) जरूर चढ़ाएं.  मान्यता है कि इससे हर बिगड़ा काम बन जाता है.रात को 09:22 बजे जब चंद्रमा उदय हो, तब चांदी के पात्र या लोटे में जल, थोड़ा दूध और अक्षत (चावल) डालकर अर्घ्य दें. अर्घ्य देने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करें , Fइसके बाद अपना उपवास खोलें. 

क्यों रखा जाता है यह व्रत? धार्मिक मान्यता है कि विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से संतान की सुख-समृद्धि और घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए रखा जाता है.  यह व्रत कोर्ट-कचहरी के मामलों और पारिवारिक क्लेश से मुक्ति दिलाने में भी अचूक माना गया है.  

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