UP के हरदोई जिले के गोपामऊ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक श्याम प्रकाश का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि चुनाव विकास से नहीं, तिकड़म से जीते जाते हैं. यह बयान वायरल होने के बाद भाजपा विधायक सवालों के घेरे में आ गए हैं वहीं, इसे लेकर सपा चीफ अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा है.
जिले के टड़ियावां ब्लॉक में प्रधानों के कार्यकाल में छह महीने की वृद्धि पर शनिवार को आयोजित सम्मान समारोह में भाजपा एमएलए श्याम प्रकाश चुनाव और राजनीति पर बेबाक टिप्पणी की. कार्यक्रम में प्रधानों को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा, ‘चुनाव केवल विकास कार्यों के आधार पर नहीं जीते जाते. राजनीतिक तिकड़म और रणनीति भी अहम भूमिका निभाती है. हमने भी बहुत विकास कार्य कराकर देख लिए. जिन गांवों में सड़कें बनवा दीं, वहां के बक्सों में वोट ही नहीं निकले. चुनाव विकास से नहीं, तिकड़म से जीते जाते हैं.’
श्याम प्रकाश ने प्रधानों से आगामी पंचायत चुनाव की तैयारी करने को कहा. उन्होंने कहा, ‘साम, दाम, दंड, भेद जो भी तिकड़म कर पाना कर लेना, लेकिन अगला चुनाव जीतना है.’ विधायक ने प्रधानों से कहा कि ऐसा कोई कार्य न करें जिससे भाजपा सरकार का प्रधानों पर से विश्वास उठ जाए. सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना जरूरी है ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके.
अखिलेश यादव ने भाजपा पर कसा तंज: भाजपा एमएलए श्याम प्रकाश के बयान पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज कसा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘भाजपा में जो जितना बेईमान, वो बैठा है उतनी ऊँची मचान! भाजपा बेईमानी से चुनाव जीतती है, इस बात को स्वीकार करके भाजपा के विधायक ने भ्रष्ट भाजपाई राजनीति का एनकाउंटर कर दिया है, साथ ही उसके ऊपर बुलडोज़र भी चलवा दिया है. देखते हैं अब इन भाजपाई विधायक को पार्टी से निकाला जाता है या भाजपा द्वारा अगला मुख्यमंत्री घोषित किया जाता है. इस बार जनता भाजपा की सारी तिकड़म निकाल देगी. भाजपा हारेगी और फिर कभी नहीं आएगी.’
ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी: दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते सोमवार को एक बयान में कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों का पालन करते हुए निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है. इसके अलावा, बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि निवर्तमान प्रधान नयी ग्राम पंचायतों के गठन तक या अधिकतम छह महीने की अवधि तक पंचायतों के सामान्य प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते रहेंगे। राज्य की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई, 2026 को समाप्त हो गया था.















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